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सपने पूरे कर छोड़ूंगा | प्रेरक हिंदी कविताएँ | Motivational Hindi Poems

by Sandeep Kumar Singh

ऐसा कोई सपना नहीं है जो पूरा नहीं किया जा सकता। बस उस सपने को पूरा करने कि जिद हो तो रस्ते अपने आप बनते चले जाते हैं। अपने मन को हमेशा इस बात के लिए तैयार रखना चाहिए कि सपने पूरे करने के लिए ही होते हैं। और अब एक सपने के पीछे लग जाओ तो हमेशा गुनगुनाते रहो :- “सपने पूरे कर छोड़ूंगा सपने पूरे कर छोडूंगा।”

सपने पूरे कर छोड़ूंगा

सपने पूरे कर छोड़ूंगा

न बोलूँगा न देखूंगा दुनिया से नाता तोडूंगा
न रुकना है न थकना है सपने पूरे कर छोडूंगा ,
मैं जान फूंक दूंगा अब तो अपना रास्ता न मोडूँगा
सपने पूरे कर छोडूंगा सपने पूरे कर छोडूंगा।

टकराना है चट्टानों से भिड़ना है जा मैदानों में
जुड़ना है धरती से मुझे उड़ना है आसमानों में,
रोक सके जज़्बात मेरे अब दम है कहाँ तुफानो में
देर लगे चाहे मुझको राहों से मुख न मोडूँगा
सपने पूरे कर छोडूंगा सपने पूरे कर छोडूंगा।

है सब्र का फल मीठा लेकिन है सब्र कहाँ इंसानों में
हो लक्ष्य न जिसका जीवन में रहता है यो श्मशानो में ,
मेरा दर्द क्या जानेगा कोई है कई राज छुपे मुस्कानों में
टकराऊंगा हर दीवार से मैं पर हाथ कभी न जोडूंगा
सपने पूरे कर छोडूंगा सपने पूरे कर छोडूंगा।

जब तक पूरे हो न जाएँ है चैन कहाँ अरमानों को
लगे न फल जब पेड़ों में जाता है कौन बागानों को ,
मन में जब है ठान लिया रोकेगा कौन दीवानों को
रच के मैं इक पाठ नया पन्ना इतिहास में जोडूंगा
सपने पूरे कर छोडूंगा सपने पूरे कर छोडूंगा।

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धन्यवाद।

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8 comments

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Pravendra Singh August 1, 2021 - 11:39 AM

आपकी कविताएं बहुत ही प्रेरणा दायक होती मुझे बहुत पसंद हैं

Reply
Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh August 12, 2021 - 2:43 PM

Thanks Pravendra Singh ji…

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B.R.Singh September 12, 2017 - 8:42 PM

Really ! Sandeep kumar ji it's great.
Aap ki Kavitayen har Dil ko chuleti hai.
B.Ramesh Singh.

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh September 13, 2017 - 6:30 AM

धन्यवाद B.Ramesh जी।

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Ankit Gujjar May 16, 2017 - 7:00 AM

टॉप है जी गजब

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 16, 2017 - 8:25 PM

बहुत-बहुत धन्यवाद Ankit Gujjar जी…..

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ashutosh singh ranawat February 24, 2017 - 1:37 PM

waah sahab kya likha hai.

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh February 24, 2017 - 1:45 PM

Dhanyawad ashutosh singh ranawat ji…….

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