Home हिंदी कविता संग्रह नशे पर कविता – ये मेरे देश को क्या हो रहा है? | Nashe Par Kavita

नशे पर कविता – ये मेरे देश को क्या हो रहा है? | Nashe Par Kavita

by Sandeep Kumar Singh

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आजकल नशे की लत देश के नौजवानों को बर्बाद करती जा रही है। इसके कारण उनके अंदर की नैतिकता भी लुप्त हो रही है। कितने ही परिवार के चिराग नशे की आग में जल कर भस्म हो रहे हैं। इसे जड़ से ख़त्म करने के लिए हमें खुद ही कोई कदम उठाना होगा। नौजवानों को ये समझाना होगा की नशा उन्हें और देश को एक दीमक की तरह खा रहा है। इसी विषय पर हम आपके लिए एक कविता लेकर आये हैं :- नशे पर कविता – ये मेरे देश को क्या हो रहा है?


नशे पर कविता – ये मेरे देश को क्या हो रहा है?

नशे पर कविता - ये मेरे देश को क्या हो रहा है?

छा गया है मातम और वक़्त रो रहा है,
अरे देखिये जनाब, ये मेरे देश को क्या हो रहा है?

जम चुका है खून रगों में आज के नौजवानों के
मिल जाती है गिरी हुई जवानी, आजकल मयखानों में,
परिवार जाग रहा है राह तकते हुए
आने वाला कहीं सड़कों पे गिरा सो रहा है,
अरे देखिये जनाब, ये मेरे देश को क्या हो रहा है?

गिर गया है ज़मीर शानें ऊँची हैं
कल का क्या होगा ये बातें किसने सोचीं हैं,
चरस है, गांजा है, है भांग और हैरोइन यहाँ
यही है कारण जो देश को डूब रहा है,
अरे देखिये जनाब, ये मेरे देश को क्या हो रहा है?

विधवा हो रही हैं सुहागिनें, राखी पकड़ रोती हैं बहनें
माँ बाप का सहारा बनना था जिसको, वही बोझ बनता रहा है,
जल रहा है नशे की आग में घराने का इकलौता वारिस
बढ़ानी थी शान-ओ-शौकत जिसने वही कुल का नाम मिटा रहा है,
अरे देखिये जनाब, ये मेरे देश को क्या हो रहा है?

सरे आम लूट रहे हैं राह चलते राहगीरों को
निशाना बनाते हैं नशे के सौदागर अकसर अमीरों को,
न दीन, धर्म, ईमान है, टूटते शरीर बिलकुल बेजान हैं
किस पर उठायें उँगली मिलीभगत से ये काम हो रहा है,
अरे देखिये जनाब, ये मेरे देश को क्या हो रहा है?

कदम बढ़ाना होगा कोई जो देश को आगे बढ़ाना है
लक्ष्य यही रहे अपना, नशे को मार भगाना है,
जवानी वापस लानी है देश के नौजवानों की
हँसाना है हर उस शख्स को जो इस दर्द से रो रहा है,
अरे देखिये जनाब, ये मेरे देश को क्या हो रहा है?

यह नशे पर कविता पढ़ के अगर जरा सी बात आपके मन में आया तो कृपया इसे दूसरों तक भी शेयर करें।

पढ़िए अप्रतिम ब्लॉग की ये सुंदर रचनाएं :-

धन्यवाद।

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23 comments

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रामस्वरूप लैकरा March 21, 2019 - 5:05 AM

नशा मुक्ति पर शानदार प्रयास.

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh March 21, 2019 - 10:35 PM

धन्यवाद रामस्वरूप लैकरा जी…

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Nasha Mukti Kendra March 19, 2019 - 4:05 PM

Bhut Achi kavita hai, Agar koi nasha mukti kendra k bare me kuch bhi janna chahta hai toh ye site jrur dekhe: www.akaldeaddictioncenter.com

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रवि January 17, 2018 - 7:11 PM

अत्ति उत्तम सर

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh January 18, 2018 - 8:41 AM

धन्यवाद रवि जी।

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alok kumar December 15, 2017 - 1:41 PM

संदीप जी, एक मार्गदर्शक और बेहतरीन कविता…….नशाखोरी हमारे समाज बहुत तेजी से बढ़ रही है.इस पर नियंत्रण की जरुरत है.

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh December 15, 2017 - 8:03 PM

बिलकुल सही बात कही आपने अलोक कुमार जी

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saurabh bajpai November 24, 2017 - 6:01 PM

Really good dear…..difinetly it works

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anil bhardwaj August 21, 2017 - 5:29 PM

Very nice

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh August 22, 2017 - 11:54 AM

Thanks anil bhardwaj ji…..

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Rakesh Kumar June 17, 2017 - 4:07 PM

sir mujhe nashe par ek lekh send karna mujhe apni ngo ki patrika me chapna h, me nasha mukti kendra me job karta hu

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ApratimGroup
ApratimGroup June 17, 2017 - 4:51 PM

राकेश जी सबसे पहले तो धन्यवाद हमारे रचनाओ को पसंद करने के लिए। हमने कुछ कविताएँ, एक-दो कहानी और स्लोगन डाले है इस ब्लॉग में नशा मुक्ति से सम्बंधित। अगर आप चाहे तो इनमे से किसी भी पोस्ट को हमारे ब्लॉग के लिंक के साथ आप अपने पत्रिका में छाप सकते है। अगर इनके अलावा कुछ और चाहिए आपको तो आप हमें [email protected] में मेल करके या हमारे फेसबुक पेज में हमसे संपर्क करके हमें बता सकते है। हमें ख़ुशी होगी आपकी मदद करके।

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Rakesh Kumar June 17, 2017 - 4:04 PM

very nice sir

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Manish Kumar June 13, 2017 - 7:01 AM

बहुत अच्छी लिखी आपने

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh June 13, 2017 - 10:43 AM

धन्यवाद Manish Kumar Ji…..

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santosh sinha May 18, 2017 - 10:03 PM

बहुत ही खूबसूरत है

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 21, 2017 - 5:09 PM

धन्यवाद Santosh Sinha जी…..

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Ayush Raj January 11, 2017 - 6:53 PM

Very very good poem

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh January 12, 2017 - 7:53 AM

Thanks Ayush Raj bro.. …..

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Vijay Singh November 7, 2016 - 10:02 PM

Good peom

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Mr. Genius
Mr. Genius November 7, 2016 - 10:03 PM

Dhanyawad Vijay Singh Ji…

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DEEPAK RAJPUT November 6, 2016 - 8:33 AM

Very good poem

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Mr. Genius
Mr. Genius November 6, 2016 - 10:34 AM

Thanks Deepak Rajput……

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