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चुनाव पर हिंदी कविता :- कुर्सी ही बस त्रेता है | देश की हालत पर कविता

by ApratimGroup
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चुनाव पर हिंदी कविता में पढ़िए देश के आज के हालातों के बारे में। कैसे चुनाव में झूठे वादे कर नेता कुर्सी प्राप्त कर लेते हैं और उसके बाद देश का क्या हाल करते हैं। इन्हीं के कारन आज हमारा देश गरीबी की मार झेल रहा है। सरहदों पर सैनिकों की शाहदत हो रही है। बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही। ऐसी ही बातों का वर्णन कर रही है यह चुनाव पर हिंदी कविता :-

चुनाव पर हिंदी कविता

चुनाव पर हिंदी कविता

कपट द्वैष ईर्ष्या के युग में,
कुर्सी  ही  बस  त्रेता  है।
कुछ पैसों में गद्दी बिकती,
मतदाता  विक्रेता  है।।

स्वार्थ साधना कर्म हीनता,
लोकतंत्रक  नीव  हीली।
आज सहादत चीख रही है,
मुक्ति उनको कहा मिली।।
मार रहे जो निरपराध को,
मारो  इन  हैवानों  को।

राष्ट्र अस्मिता के भक्षक जो,
मारो  उन  सैतानो  को।।
कुछ पैसों के खातिर इनको,
मत जो  अपना  देता  है।
कपट द्वैष ईर्ष्या के युग में,
कुर्सी  ही  बस  त्रेता  है।।

आतंकवादी  नक्सलवाद,
सब  इनके  ही  प्यादे हैं।
इनके ही उँगली पर नाचें,
सब  इनकी  औलादें  हैं।।
सत्ता खातिर हर दिन हर पल,
ताण्डव  नग्न दिखाते है।

संबिधान की बोटी बोटी,
काट काट खा  जाते  है।।
बात करें नारी रक्षण की,
ये   अस्मत   के  क्रेता हैं।
कपट द्वैष ईर्ष्या के युग में,
कुर्सी  ही  बस  त्रेता  है।।

आज सिंहासन पर बैठे हो,
भूखी  जनता  याद  नहीं।
तुम जैसे  गद्दारों  से  अब ,
हिन्दुस्ताँ  आबाद  नहीं।।
शोणित दे जो दी आजादी,
देख   तुझे  रोता  होगा।

इस आजादी पर अपना वो,
आपा  भी  खोता  होगा।।
पूछ  रहा बलिदानी तुझसे,
आज  उसे  क्या देता  है।
कपट द्वैष ईर्ष्या के युग में,
कुर्सी  ही  बस  त्रेता  है।।

पढ़िए :- चुनाव पर कविता “चुनावी मेला सजने लगा।”


पंडित संजीव शुक्ल यह कविता हमें भेजी है पं. संजीव शुक्ल “सचिन” जी  ने। आपका जन्म गांधीजी के प्रथम आंदोलन की भूमि बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के मुसहरवा(मंशानगर ग्राम) में 07 जनवरी 1976 को हुआ था | आपके पिता आदरणीय विनोद शुक्ला जी हैं और माता आदरणीया कुसुमलता देवी जी हैं जिन्होंने स्वत: आपको प्रारंभिक शिक्षा प्रदान किए| आपने अपनी शिक्षा एम.ए.(संस्कृत) तक ग्रहण किया है | आप वर्तमान में अपनी जीविकोपार्जन के लिए दिल्ली में एक प्राईवेट लिमिटेड कंपनी में प्रोडक्शन सुपरवाईजर के पद पर कार्यरत हैं| आप पिछले छ: वर्षों से साहित्य सेवा में तल्लीन हैं और अब तक विभिन्न छंदों के साथ-साथ गीत,ग़ज़ल,मुक्तक,घनाक्षरी जैसी कई विधाओं में अपनी भावनाओं को रचनाओं के रूप में उकेर चुके हैं | अब तक आपकी कई रचनाएं भी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में छपने के साथ-साथ आपकी  “कुसुमलता साहित्य संग्रह” नामक पुस्तक छप चुकी है |

आप हमेशा से ही समाज की कुरूतियों,बुराईयों,भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर कलम चलाते रहे हैं|

‘ चुनाव पर हिंदी कविता ‘ के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे लेखक का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

धन्यवाद।

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4 comments

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Krishna अक्टूबर 12, 2020 - 7:31 अपराह्न

Aapke is blog ke Kavita pe main video Bana Sakta hu kya Sahab please reply just now yes or no

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Krishna अक्टूबर 12, 2020 - 7:29 अपराह्न

Contact us me through this My mail at
krishnadas03rali@gmail.com please just now

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sagir khan जून 14, 2020 - 1:07 अपराह्न

sir kya is kavita par video bana sakte hai

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh जून 19, 2020 - 9:55 अपराह्न

contact us through mail at blogapratim@gmail.com

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