Home विविध परीक्षा क्या है :- परीक्षा का महत्व, उद्देश्य और शाब्दिक अर्थ | Pariksha Kya Hai

परीक्षा क्या है :- परीक्षा का महत्व, उद्देश्य और शाब्दिक अर्थ | Pariksha Kya Hai

by Sandeep Kumar Singh

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परीक्षा के नाम से डर लगता है? क्या परीक्षा के कारन आपकी रातों की नींद उड़ जाती है? लेकिन शायद आप ये नहीं जानते कि परीक्षा तो आपकी मित्र है। इसके बारे में जानकर आपको इस बात का आभास हो जायेगा कि परीक्षा का हमारे जीवन में कितना महत्व है। उसके बाद आपमें इसका सामने करने की ज्यादा नहीं तो कुछ तो हिम्मत आएगी ही। तो आइये जानते हैं परीक्षा क्या है ( Pariksha Kya Hai ) :-

परीक्षा क्या है

परीक्षा क्या है

परीक्षा क्या है ? परीक्षा शब्द का अर्थ

सबसे पहले आइये जानते हैं कि परीक्षा क्या है मतलब परीक्षा शब्द का अर्थ क्या है। परीक्षा दो शब्दों के मेल ( परि + ईक्षा ) से उत्पन्न हुआ शब्द है। परि का अर्थ है चारों तरफ और ईक्षा का अर्थ है देखना। तो इस लिहाज से तो इस शब्द के आधार पर यदि हम किसी की परीक्षा लेते हैं तो उसे चारों तरफ से देखते हैं। ये देखते हैं कहीं उसमे कोई कमी तो नहीं है। ये देखना कि क्या वो एक दिये गए मापदंड में खरा उतरता है या नहीं।

परीक्षा का आरंभ

यूँ तो परीक्षा का आरंभ कोई भी किसी भी समय से बता सकता है। परन्तु मानव की परीक्षा तो उसके जन्म से ही आरंभ हो जाती है। सबसे पहली परीक्षा इस बात की कि वह अपने वातावरण में खुद को कब तक ढाल लेगा। ढाल भी सकता है या नहीं। परीक्षा इस बात की कि क्या वह अपनी मुसीबतों का सामना कर सकता है? शिक्षा के क्षेत्र में परीक्षा पुरातन काल से ही या यूँ कहें कि कई युगों से ली जा रही है। परीक्षा हमेशा अदृश्य रूप में भी हमारे जीवन में चलती रहती है।

पुरातन काल में एक गुरु जिसे भी अपना उत्तराधिकारी बनाते थे। वे कभी-कभी ही उसकी परीक्षा लिया करते थे। उसकी असल परीक्षा तो उसकी शिक्षा, सेवा और व्यव्हार की होती थी। दौर था मौखिक परीक्षा का लिखने का चलन उस समय ज्यादा नहीं था। मुख्य बात यह थी कि लिखने के लिए सामग्री बहुत महंगी मिलती थी। इसलिए मौखिक शिक्षा का ही आदान-प्रदान किया जाता था। जिस कारन परीक्षा भी मौखिक ही होती थी।

समय के साथ इन परीक्षाओं ने लिखित रूप ले लिया। आज के समय में लिखित और मौखिक दोनों ही परीक्षाएं अस्तित्व में हैं।

परीक्षा का महत्व और उद्देश्य

श्रेष्ठता की पहचान और किसी स्थिति का सामना करने की तैयारी का निरिक्षण ही सदैव परीक्षा का उद्देश्य रहा है। परीक्षा हमें हमारी कमियों और हमारी ताकत के बारे में बताती है। यह एक ऐसे मित्र की तरह है जो हमे सच्चाई का आइना दिखता है। यदि परीक्षाओं का अस्तित्व न होता तो शायद जिन्दगी में आगे बढ़ना बहुत कष्टदायक होता।

उदाहरण के लिए मान लीजिये आपको जंगल में रहने का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कभी भी आपको सीधा ही जंगल में नहीं रहने दिया जायेगा। पहले आपकी परीक्षा होगी। जो की आपकी योग्यता को परखने के लिए बहुत आवश्यक है। इस दौरान हो सकता है जंगल में आपके सामने कोई ऐसी समस्या आ जाए जिस से आपको निपटने का तरीका प्रशिक्षण के दौरान न सिखाया गया हो। ऐसे में आपके पास एक और मौका रहता है खुद में सुधार करने का।

इस तरह हम अपने आप को हीरे की तरह तराश सकते हैं। जो हमारी आगे बढ़ने में सहायता करता है।

अंत में

परीक्षा का नाम सुनते ही सबके मन में घबराहट सी पैदा हो जाती है। लेकिन परीक्षा तो हमारी दोस्त की तरह ही है। जैसा की हम ऊपर बता ही चुके हैं। आगे ये आपकी मानसिकता पर निर्भर करता है कि आप परीक्षा को किस नजरिये से देखते हैं। परीक्षा हमेशा सच्चाई से अवगत कराती है। और यदि आप परीक्षा से डरते हैं तो इसका अर्थ है आप सच्चाई से डरते हैं।



वेदों और पुराणों का अध्ययन करने पर आपको इस बात का ज्ञान होता है कि परीक्षा क्या है ? परीक्षा से तो कई बार भगवान् को भी गुजरना पड़ा है। ऐसे में हम तो साधारण से इन्सान भर हैं। इसलिए परीक्षा से घबराइए नहीं। परीक्षा में कोई असफल नहीं होता बल्कि ये तो एक और मौका देती है अपनी गलतियों को सुधारने और अपने व्यक्तित्व को निखारने का।

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धन्यवाद।

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