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बसंत पर कविता – आया है ऋतुराज | Basant Par Kavita

by Sandeep Kumar Singh
1 minutes read

आज हम लेकर आए हैं एक बेहद सुंदर कविता, जो बसन्त ऋतु की मनमोहक सुंदरता, प्रकृति की मुस्कान और नए जीवन के संदेश को दर्शाती है। जब पेड़ फूलों का हार पहनते हैं, कोयल प्रेम के गीत गाती है, और सरसों के खेत सुनहरी चादर ओढ़ लेते हैं — तब आता है ऋतुराज बसन्त। आइए, इस मधुर कविता के माध्यम से महसूस करते हैं बसन्त का जादू।

बसंत पर कविता

बसंत पर कविता

आया है ऋतुराज लिए फिर
जग में नई बहार,
पेड़ खड़े स्वागत में इसके
ले फूलों का हार।

तितली भँवरों के दल के दल
रहे मस्त हो घूम,
मलयज के झोंकों में कलियाँ
रही खुशी से झूम।

टेसू के खिलते फूलों से
वन है सारा लाल,
देख – देख कमलों की शोभा
उल्लासित है ताल।

पीपल पर नव पल्लव फूटे
बौराया है आम,
लिखे हवा में कोकिल ने भी
गीत प्रीत के नाम।

मुस्काये हैं जूही चम्पा,
हँसती है कचनार,
लतिकाओं को झुला रही है
शीतल मन्द बयार।

सरसों के पीले खेतों पर
छाया नीला व्योम,
पुलक रहा है खुशियों में भर
कुदरत का हर रोम।

दिन बसन्त के गुलमोहर – से
रजनीगन्धा रात,
भरी हुई है हँसी – खुशी की
हर पल में सौगात।

सुना दिया है आ बसन्त ने
नव जीवन का गान,
पतझर में भी हमें दे गया
एक मधुर मुस्कान।

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आशा है दोस्तों, आपको यह सुंदर बसन्त कविता पसंद आई होगी। अगर इस कविता ने आपके दिल को छुआ हो, तो कमेन्ट करना न भूलें। ऐसी ही सुंदर कविताओं और भावनात्मक रचनाओं के लिए जुड़े रहें हमारे साथ।

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