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सकारात्मक सोच की शक्ति कहानी – सोच बनती है हकीक़त

by Sandeep Kumar Singh
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आप पढ़ रहे है – सकारात्मक सोच की शक्ति कहानी – सोच बनती है हकीक़त ।

सकारात्मक सोच की शक्ति कहानी

सकारात्मक सोच की शक्ति कहानी

मैं कक्षा में पढ़ा रहा था। तभी मैंने एक पंक्ति अंग्रेजी में बोल दी। अचानक ही एक विद्यार्थी ने खड़े होकर कहा,
“सर आप बहुत बढ़िया अंग्रेजी बोलते हैं।
मैंने कहा,
“तुम भी ऐसी अंग्रेजी बोल सकते हो।”

उस विद्यार्थी ने मेरी बात को नकारते हुए कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकता। उसके द्वारा कारण यह दिया गया कि उसे ज्यादा अंग्रेजी नहीं आती इसलिए वह अंग्रेजी नहीं बोल सकता। मैंने उसका हौंसला बढ़ने की कोशिश करते हुए कहा कि तुम बोल सकते हो लेकिन उसने अपना इस बात पर टिका रखा था कि वह कभी भी अंग्रेजी नहीं बोल सकता।

“क्या मैं ये पेंसिल उठा सकता हूँ?”
मैंने पुछा और सब ने जवाब दिया, हाँ आप उठा सकते हैं।”
मैंने कहा नहीं मैं नहीं उठा सकता लेकिन बच्चों का कहना था कि मैं उठा सकता हूँ।

“आप सब कैसे कह सकते हैं कि मैं इसे उठा सकता हूँ?”
“सर क्योंकि हम आपकी शक्ति के बारे में जानते हैं।

“बस यही चीज तो मैं कहना चाहता था कि आप अंग्रेजी बोल सकते हो। सबसे पहले अपने मन को इसके लिए तैयार करो। अगर तुम कहोगे कि तुम नहीं कर सकते तो तुम कभी नहीं कर सकोगे। कम से कम एक बार करने की कोशिश तो करो जो तुम करना चाहते हो लेकिन याद रहे इमानदारी से। उसी समय नहीं लेकिन आने वाले कल में आपको उसका नतीजा जरूर मिलेगा जो आप आज कर रहे हो।”

आप तब तक अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकते जब तक आप उसे प्राप्त करने के बारे में सोचते नहीं।

इसके बाद सब मुझसे सहमत थे।

ये सिर्फ एक विचार नहीं है। ये सच्चाई है, हमारी सोच बनती है हकीक़त । अगर हम सोचेंगे कि हम नहीं कर सकते तो हम सच में नहीं कर सकते। अगर हम हाँ कहें तो हमारे पास जीतने के मौके होंगे। कम से कम इस बात की संतुष्टि तो होगी कि आपने एक बार प्रयास किया। आप सब कुछ कर सकते हैं। आप अपने जीवन के मालिक हैं इसलिए इसे अपने अनुसार जियें। सकारात्मक सोचें, सकारात्मक रहें अपनी मन की शक्ति को पहचाने। एक दिन ये दुनिया आपकी होगी।

मुझे उम्मीद है आप सब भी मुझसे सहमत होंगे। अगर हाँ तो इस कहानी को शेयर करें। यदि नहीं तो उसका कारण कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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धन्यवाद

 

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