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सकारात्मक सोच पर कविता :- हँसते गाते करो जीवन व्यतीत | एक आशावादी कविता

by ApratimGroup

हँसना हमारे लिए बहुत आवश्यक है। लेकिन न जाने क्यों आज के लोग ईर्ष्या, द्वेष और दुर्भाव में अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। हमें यह जीवन प्यार बाँटने और सद्भाव से रहने के लिए मिला है। हमें हर पल हंस कर गुजारना चाहिए। छोटी-छोटी बातों को दिल से नहीं लगाना चाहिए। लोगों के साथ मिलजुल कर रहना चाहिए। यही सन्देश दे रहे हैं सूरज आर्य जी इस ‘ सकारात्मक सोच पर कविता ‘ में :-

सकारात्मक सोच पर कविता

सकारात्मक सोच पर कविता

हर क्षण करो मृदुल सी बात
धुल जाए वाणी से मैला गात,
क्षण में होगी व्यतीत दुखद रात
बन जायेगा विष अमृत नवनीत,
होठों पर हो प्रेम सुधा संगीत।
हँसते गाते करो जीवन व्यतीत।।

तिनके से तेरा हो न बैर
कोई प्राणी तेरा हो न गैर,
स्वर मधुमय सर्वत्र बिखेर
सबके हृदय में जागे प्रीत,
प्रेम से सम्पूर्ण विश्व लो जीत।
हँसते गाते करो जीवन व्यतीत।।

कोई बैरी न हो जग में तेरा
हृदय में डाल प्रेम का डेरा,
न जाने कब छ जाए अँधेरा
आना जाना तो है जग की रीत,
जो बुरा हुआ भुला दो अतीत
हँसते गाते करो जीवन व्यतीत।।

मृदुल शब्दों से मिट जाए घात
काली रात भी लगे प्रभात,
शब्द रहेंगे तेरे मिट जाएगा गात
सदैव स्मरण रहे ऐसा गीत,
होठों पर हो प्रेम सुधा संगीत।
हँसते गाते करो जीवन व्यतीत।।

पढ़िए सकारात्मकता पैदा करती यह प्रेरणादायक रचनाएं :-


नमस्कार प्रिय मित्रों.

सूरज कुमार

मेरा नाम सूरज कुमार है और मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सिंहपुरा गांव का रहने वाला एक छोटा सा कवि हूँ। बचपन से ही मुझे कविताएं लिखने का शौक है तथा मैं अपनी सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने देश और समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जिससे समाज में मेरी कविताओं के माध्यम से मेरे शब्दों के माध्यम से बदलाव आए। क्योंकि मेरा मानना है आज तक दुनिया में जितने भी बदलाव आए हैं वह अच्छी सोच तथा विचारों के माध्यम से ही आए हैं अगर हमें कुछ बदलना है तो हमें अपने विचारों को अपने शब्दों को जरूर बदलना होगा तभी हम दुनिया में हो सब कुछ बदल सकते हैं जो बदलना चाहते हैं।

‘ सकारात्मक सोच पर कविता ‘ के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढने का मौका मिले।

धन्यवाद।

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2 comments

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Harry Styles September 30, 2021 - 6:52 PM

Who is the poet of this poem?

Reply
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KUNAL December 10, 2019 - 9:02 PM

Thanks for the writer

Reply

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