Home » हिंदी कविता संग्रह » पुराने दिनों की याद कविता :- मैंने भी बुरे काम किए हैं

पुराने दिनों की याद कविता :- मैंने भी बुरे काम किए हैं

by ApratimGroup
0 comment

बचपन के बारे में आप सब ने बहुत सी कविताएँ पढ़ी होंगी। लेकिन जो बातें आप इस कविता में पढने जा रहे हैं। ऐसी बातें बहुत कम ही लिखी जाती हैं। बचपन के बाद जब हम किशोर अवस्था में पहुँच जाते हैं तब अक्सर ही हम कुछ ऐसी हरकतें करते हैं जो हमें बहुत मजेदार लगती हैं। वो सही भी होती हैं और सही नहीं भी होती। क्योंकि अगर कुछ शैतानी न की हो तो याद करने के लिए कुछ नहीं बचता। आये पढ़ते हैं इसी विषय पर “ पुराने दिनों की याद कविता ”

पुराने दिनों की याद कविता

पुराने दिनों की याद कविता

मैंने भी बुरे काम किए हैं,
प्रेम पत्र लिए और दिए हैं,
घर वालों से छुपाकर रखता,
फ़ाड़ भी ना मैं था सकता,
सिर्फ़ मज़े के जाम पीये हैं
मैंने भी बुरे काम किए हैं।

अमरूद चुराये हैं स्कूल से आते,
पेट फटता था खाते – खाते,
देर हुई तो माँ की गाली,
हमने कहां थी होश संभाली,
मस्ती की ज़िंदगी मस्ती में जिये हैं
मैंने भी बुरे काम किए हैं।

शरारती भी थे हमने माना,
पढ़ने में मन खूब लगाना,
पहले दर्जे में पास थे होते,
परीक्षा दिनों में ना थे सोते,
फटे बस्ते भी बहुत सिये हैं,
मैंने भी बुरे काम किए हैं।

यशु जान वो दिन थे कैसे,
जेब में चाहे थे ना पैसे,
ख़ुशी बहुत थी कुछ ना होने की,
ना ही थी कोई वज़ह रोने की,
अब तो हम जैसे कद्दू , घिये हैं,
मैंने भी बुरे काम किए हैं।

पढ़िए :- बचपन के दिनों पर छोटी कविता 


Yashu Jaanयशु जान (9 फरवरी 1994-) एक पंजाबी कवि और अंतर्राष्ट्रीय लेखक हैं। वे जालंधर शहर से हैं। उनका पैतृक गाँव चक साहबू अप्प्रा शहर के पास है। उनके पिता जी का नाम रणजीत राम और माता जसविंदर कौर हैं। उन्हें बचपन से ही कला से प्यार है। उनका शौक गीत, कविता और ग़ज़ल गाना है। वे विभिन्न विषयों पर खोज करना पसंद करते हैं।

उनकी कविताएं और रचनाएं बहुत रोचक और अलग होती हैं। उनकी अधिकतर रचनाएं पंजाबी और हिंदी में हैं और पंजाबी और हिंदी की अंतर्राष्ट्रीय वेबसाइट पर हैं। उनकी एक पुस्तक ‘ उत्तम ग़ज़लें और कविताएं ‘  के नाम से प्रकाशित हो चुकी है। आप जे. आर. डी. एम्. नामक कंपनी में बतौर स्टेट हैड काम कर रहे हैं और एक असाधारण विशेषज्ञ हैं।

उनको अलग बनाता है उनका अजीब शौंक जो है भूत-प्रेत से संबंधित खोजें करना, लोगों को भूत-प्रेतों से बचाना, अदृश्य शक्तियों को खोजना और भी बहुत कुछ। उन्होंने ऐसी ज्ञान साखियों को कविता में पिरोया है जिनके बारे में कभी किसी लेखक ने नहीं सोचा, सूफ़ी फ़क़ीर बाबा शेख़ फ़रीद ( गंजशकर ), राजा जनक,इन महात्माओं के ऊपर उन्होंने कविताएं लिखी हैं।

‘ पुराने दिनों की याद कविता ‘ के बारे में अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

धन्यवाद।

You may also like

Leave a Comment

* By using this form you agree with the storage and handling of your data by this website.