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गांधी जयंती पर दोहे :- महात्मा गाँधी पर दोहे | Mahatma Gandhi Par Dohe

गांधी -दर्शन में मानवता और नैतिकता को सर्वोपरि माना है। अनैतिकता और हिंसा के सहारे लक्ष्य प्राप्ति के गांधी जी सदैव विरोधी रहे। साधनों की पवित्रता पर उन्होंने सर्वाधिक बल दिया है। सत्य और अहिंसा के सहारे उन्होंने भारत को आजादी दिलाकर विश्व के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत किया है। इन दोहों में गांधी जी के जीवन -दर्शन को बताने का प्रयास किया गया है । आइये पढ़ते हैं गांधी जयंती पर दोहे :-

गांधी जयंती पर दोहे

गांधी जयंती पर दोहे

आजादी का फूँककर, आम जनों में मंत्र ।
गांधी जी ने कर दिया, भारत देश स्वतंत्र ।।

साधन पावन ही रहें, था गांधी का जोर ।
चाहे देरी से मिले, हमें लक्ष्य का छोर ।।

गांधी का जीवन रहा, सच के साथ प्रयोग ।
जिससे लग पाया नहीं, उन्हें रूढ़ि का रोग ।।

गांधी में कमियाँ रहीं, थे वे भी इंसान ।
सच्चाई के साथ से, लेकिन बने महान ।।

रोजगार उपलब्धि का, चरखा रहा प्रतीक ।
थी गांधी की दृष्टि यह, भारत के हित ठीक ।।

बता न्याय की प्राप्ति हित, सत्याग्रह को ठीक ।
सत्य अहिंसा शांति के, गांधी बने प्रतीक ।।

जो जन -जन में व्याप्त है, बनकर एक विचार ।
उस गांधी को मौत भी, कब सकती है मार ।।

महात्मा गाँधी पर दोहे का विडियो यहाँ देखें :-

Mahatma Gandhi Par Dohe | गांधी जयंती पर दोहे

गांधी जयंती पर दोहे आपको कैसे लगे ? अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

पढ़िए भारत के महापुरुषों के विचार :-

धन्यवाद।

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