Home हिंदी कविता संग्रह न जाने कहाँ तू चली गयी माँ :- माँ की याद में मार्मिक कविता

न जाने कहाँ तू चली गयी माँ :- माँ की याद में मार्मिक कविता

by Sandeep Kumar Singh

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न जाने कहाँ तू चली गयी माँ :- इंसान को जीवन देने वाली माँ ही होती है। उसके जीवन को आधार  देने वाली भी माँ ही होती है। एक माँ का दर्जा किसी इन्सान के जीवन में भगवान् से कम नहीं होता। वही इन्सान की जननी और पहली गुरु होती है। वही एक बालक को जो संस्कार देती है इसके द्वारा वह एक सफल इन्सान बनता है।

माँ का जीवन में वो स्थान होता है जो खाली होने पर कोई भी नहीं भर सकता। माँ के जाने के बाद ये जीवन बेकार सा लगने लगता है। माँ की याद में अक्सर आँख अपने आप भर जाती है और मन में उसकी छवि अपने आप उभर जाती है। ऐसी ही भावना को मैंने इस कविता में प्रस्तुत करने की कोशिश की है। आशा करता हूँ आप सबको यह कविता ‘ न जाने कहाँ तू चली गयी माँ ‘ अवश्य पसंद आएगी।

न जाने कहाँ तू चली गयी माँ

न जाने कहाँ तू चली गयी माँ

तुझसे मिली साँसे, तुझसे मिला जीवन,
तुझसे ही सब रिश्ते, तुझसे जुड़ा ये मन,
दुनिया तो देती है ठोकर हर दम,
इक तेरी ही गोदी में झूले थे हम,
वो लोरी तेरी सुनके सोते थे हम
तेरे होने से न होता था हमको कोई गम

न जाने कहाँ तू चली गई माँ
वापस आजा ओ माँ
तेरी याद बहुत आती है
बीतें पलों की
यादें रुला जाती हैं।

 

आपस में लड़ते थे जो हम भाई बहन
तू समझाती थी रहो सब मिल जुल कर,
दुःख अपने न हमको बताती थी तू,
देखकर हमको मुस्कुराती थी तू,
भूखे हमको कभी भी न सोने दिया
खाली पेट तो खुद सो जाती थी तू,

न जाने कहाँ तू चली गई माँ,
आज इतना बुलाने पे
क्यों नहीं आती है?
बीतें पलों की
यादें रुला जाती हैं।

जिंदगी में जो खुशियों की है ये बहार
आशीर्वाद है तेरा ये तेरा है प्यार
तेरी बातों को अब तक न भूलें हैं हम
जिंदगी में बहुत दुःख झेले हैं हम
तू दिखती नहीं हैं कहीं भी
तेरा अहसास तो फिर भी साथ ही रहता है

न जाने कहाँ तू चली गई माँ,
अब खुशियाँ भी
पास न आती हैं,
बीतें पलों की
यादें रुला जाती हैं।

पढ़िए :- माँ की याद में कविता – तू लौट आ माँ

मित्रों अगर आपको यह कविता अछि लगी तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें।

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धन्यवाद।

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29 comments

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Rajendrakothari May 11, 2019 - 10:24 PM

बहुत मार्मिक कविता है

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prity April 21, 2019 - 2:25 PM

bahut khubsurat

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 3, 2019 - 10:21 AM

धन्यवाद प्रीती जी।

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Shravan kr singh December 3, 2018 - 9:25 PM

Sandip ji ham aapke sundar vichar aur bhavnao ke kayal ho gaye he..
Aapki sudar vichar aur bhavana ki ham kadra karte he..

Mera naam shravan kr singh he..
823****216 my official no..
Aasha aur ummid he aap mujhse sampark karenge..

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh December 5, 2018 - 8:06 PM

धन्यवाद श्रवण कुमार सिंह जी।

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Puneet Dubey May 13, 2018 - 8:49 AM

Nice poem those who are wrote

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 13, 2018 - 1:37 PM

Thanks Puneet Dubey Ji…

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vijay kr rajbhar April 21, 2018 - 9:12 AM

Wonderful and heart touching ……..beyond the description……….

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 21, 2018 - 6:07 PM

Thanks Vijay Kr Rajbhar….

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Suhel Akhtar March 1, 2018 - 1:12 PM

Nice
Bahut sundar
Is kavita se bahut kuch yaad aata hai.

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aryan yadav January 31, 2018 - 9:39 AM

Aapki Kavita me bhut dard chhipa hai.apki Kavita ko pd kr mere aanshu aa gaye

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh January 31, 2018 - 9:24 PM

आर्यन यादव जी ये तो बस भावनाओं का कमल है जो शब्दों में अपना रंग दिखाती हैं।

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Kishan sahu December 7, 2017 - 8:10 AM

Nice Kavita bhaiyya ji

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh December 7, 2017 - 1:49 PM

धन्यवाद किशन साहू जी।

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arun dev patel December 2, 2017 - 10:22 PM

nice kavta

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh December 3, 2017 - 2:31 PM

Thanks Arun Dev patel ji…

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Hema gupta October 14, 2017 - 7:37 PM

Nice poem

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh October 14, 2017 - 10:13 PM

Thanks Hema Gupta ji….

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देवेंद्र August 20, 2017 - 4:21 PM

Sandeep ji क्या मैं फेसबुक पर आपकी उक्त कविता की चंद पंक्तियां शेयर कर सकता हूँ।

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh August 20, 2017 - 6:08 PM

जी जरूर देवेंद्र जी। लेकिन पंक्तियों के अंत में इस कविता का लिंक जरूर शेयर करके हमारा सहयोग जरुर करे।
धन्यवाद।

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देवेंद्र August 20, 2017 - 4:19 PM

मार्मिक कविता

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salim June 7, 2017 - 8:48 PM

Nice

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh June 7, 2017 - 8:49 PM

Thanks salim bhai……

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MAHENDRA SHARMA May 23, 2017 - 5:21 PM

NICE KAVITA

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 23, 2017 - 6:24 PM

Thanks Mahendra Sharma ji….

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Sunny May 22, 2017 - 9:11 PM

ye kavita Sach me Kafi sunder h, aur maa bete ke beach apprication ko Kafi acha dikya h thank you sir

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 22, 2017 - 9:14 PM

धन्यवाद Sunny जी…..हम तो बस लिखने का प्रयास करते हैं आप जैसे पाठकों के पढ़ने से कविता पाने आप सुंदर हो जाती है। एक बार फिर आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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Banshi May 14, 2017 - 1:43 PM

Good one…Hppy mother's day

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 21, 2017 - 5:12 PM

Thanks Bro……

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