हिंदी कविता : थक चुका हूँ मैं | Hindi Poem – Thak Chuka Hu Mai Lyrics

दोस्तों हम सब के दिल में कई बार अपने जीवन के हालातों को देखकर बहुत दुःख होता है। जब कई प्रयासों के बाद भी हमें सफलता न मिले। उस समय लगता है कि हमारा जीवन व्यर्थ सा है। ऐसी ही कुछ पीड़ा मैंने इस कविता द्वारा पेश करने की कोशिश की है हिंदी कविता : थक चुका हूँ मैं में।


हिंदी कविता : थक चुका हूँ मैं

हिंदी कविता : थक चुका हूँ मैं

जीवन की इस भाग दौड़ से,
हर आने वाले नए मोड़ से,
थक चुका हूँ मैं।

हर पल एक नई जंग की
तैयारी होती है।

रोज उठता हूँ तो
कई ग़मों से यारी होती है।

कलम उठा कर
लिखने लगता हूँ मैं जज़्बात अपने,

पढ़ लेता है कोई तो
बहुत दुश्वारी होती है।

संघर्षों की आग में अब
पक चुका हूँ मैं।
जीवन की इस भाग दौड़ से,
हर आने वाले नए मोड़ से,
थक चुका हूँ मैं।

बहुत मुश्किल से दो पल
फुर्सत का इंतजाम होता है।

करने वाला कोई और है
और किसी और का नाम होता है।

तबाह होते हैं जब शहर तो
शहज़ादे महफूज होते हैं,

कोई बर्बाद होता है तो
वो लोग आम होते हैं।

भेदभाव की इस दुनिया में
अटक चुका हूँ मैं।
जीवन की इस भाग दौड़ से,
हर आने वाले नए मोड़ से,
थक चुका हूँ मैं।

कुछ छोड़ देते हैं खाना
डाइटिंग के नाम पर,

कुछ लोगों को न
एक वक्त खाना नसीब होता है।

तपती गर्मी में कई
ऐसी के नीचे सोते हैं,

हादसे सोते लोगों के साथ तो
बस फुटपाथ पर होते हैं।

कानून भी हस्ती का होता है अब ये सीख
सबक चुका हूँ मैं।
जीवन की इस भाग दौड़ से,
हर आने वाले नए मोड़ से,
थक चुका हूँ मैं।

न जाने कब कोई सुधार आएगा।
वतन को सुधारने कब
कोई अवतार आएगा।

बचपन से जो देखी है
मैंने हालत हिंदुस्तान की,

न जाने कितनी बार
सिसक चुका हूँ मैं।

जीवन की इस भाग दौड़ से,
हर आने वाले नए मोड़ से,
थक चुका हूँ मैं।
थक चुका हूँ मैं।

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धन्यवाद।

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11 Comments

  1. Avatar सुनील जैन"मुरारिया"नेताजी पूर्व जिला पंचायत सदस्य तहसील लटेरी जिला विदिशा(म.प)
  2. Avatar Krishan Jangid
  3. Avatar Amod
  4. Avatar Zeeshan
  5. Avatar Ajay Ingle

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