हिंदी कविता जीवन एक सीख :- परिंदा दो-चार दिन में फड़फड़ाना सीख लेता है

आवश्यकता अविष्कार की जननी है। जब किसी को कोई जरूरत होती है तो वह उस अनुसार खुद को ढाल ही लेता है। वह अपने लक्ष्य से इतना प्रेरित होता है कि उसमें एक अजीब हिम्मत और हौसला आ जाता है। जिससे वह हर काम आसानी से कर लेता है। जैसे भूख लगने पर एक पंछी तूफानों में भी अपना पेट भरने के लिए संघर्ष करता है और दाना ढूंढता है। ऐसी ही कुछ उदाहरणों को बता रहे हैं रचनाकार इस ‘ हिंदी कविता जीवन एक सीख ‘ के माध्यम से :-

हिंदी कविता जीवन एक सीख

हिंदी कविता जीवन एक सीख

हटाकर घास-पूस को
दाना उठाना सीख लेता है,
परिंदा दो-चार दिन में 
फड़फड़ाना  सीख लेता है।

गरीबी खुद ला के दे देती है
बिन माँगे हुनर ऐसा,
कि नाज़ुक पाँव भी
रिक्शा चलाना सीख लेता है।

सियासत वो मदरसा है कि
जहाँ तालीम ले-ले कर,
अनपढ़ अनाड़ी एक को
ग्यारह बनाना सीख लेता है।

आशिक़ इश्क़ के चक्कर में
कुछ सीखे या ना सीखे,
घरों में हर रोज देर से
आने का बहाना सीख लेता है।

ज़माना भला-बुरा कुछ भी
कहे मेरी रचनाओं के बारे में,
मगर पढ़े जो एक बार वो भी
गुनगुनाना सीख लेता है।

पढ़िए :- मेहनत पर प्रेरणादायक कविता ‘हाथों की लकीरें’


Praveen kucheriaमेरा नाम प्रवीण हैं। मैं हैदराबाद में रहता हूँ। मुझे बचपन से ही लिखने का शौक है ,मैं अपनी माँ की याद में अक्सर कुछ ना कुछ लिखता रहता हूँ ,मैं चाहूंगा कि मेरी रचनाएं सभी पाठकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनें।

‘ हिंदी कविता जीवन एक सीख ‘ के बारे में अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

धन्यवाद।

qureka lite quiz

Add Comment