Home हिंदी कविता संग्रहप्रेरणादायक कविताएँ रक्तदान दिवस पर कविता :- रक्तदान का महत्व बताती कविता

रक्तदान दिवस पर कविता :- रक्तदान का महत्व बताती कविता

by Sandeep Kumar Singh

सूचना: दूसरे ब्लॉगर, Youtube चैनल और फेसबुक पेज वाले, कृपया बिना अनुमति हमारी रचनाएँ चोरी ना करे। हम कॉपीराइट क्लेम कर सकते है

रक्तदान को महादान भी कहा जाता है। इसका कारण तो साफ़ ही है। आपका किया रक्तदान किसी के प्राण बचाता है। और आप जिसके प्राण अपने दान द्वारा बचाते हैं। वह तो महादान ही हुआ। इसीलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा रक्तदान को समर्पित रक्तदान दिवस 14 जून, 2004 को घोषित किया गया। यह हर वर्ष मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करना है। वहीं भारत में राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस 1 अक्टूबर को मनाया जाता है। लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए हम लाये हैं रक्तदान दिवस पर कविता :-

रक्तदान दिवस पर कविता

रक्तदान दिवस पर कविता

इंसान जरूरत पड़ने पर जब इंसान के काम ही ना आये
ऐसे इन्सान के पास तो, भगवान् कभी भी न जायें,
जरूरत है दुनिया में लाखों कोन उनके चेहरे पर मुस्कान धरो
फिर खून का रिश्ता जुड़ जाएगा पहले तुम रक्तदान करो।

व्यर्थ न जाए की हुयी नेकी, कर्मों के फल भी मिलते हैं
बच जाए एक इंसान तो जाने कितने ही चेहरे खिलते हैं,
किसी मरते हुए अनजान को आज तुम एक जीवन दान करो
फिर खून का रिश्ता जुड़ जाएगा पहले तुम रक्तदान करो।

पहचाने दर्द जो दूसरों का वही तो सच्चा इंसान है
कोई छोटा-मोटा काम नहीं, ये दान तो बहुत महान है,
करके यह दान इंसानियत का ऊँचा नाम करो
फिर खून का रिश्ता जुड़ जाएगा पहले तुम रक्तदान करो।

जात-पात है इंसानों में, रक्त की कोई जात नहीं
रक्त की कमी से मरते को, इस से बड़ी कोई सौगात नहीं
बिना किसी स्वार्थ के तुम अपनी ये सोच बलवान करो
फिर खून का रिश्ता जुड़ जाएगा पहले तुम रक्तदान करो।

रिश्ते हैं कई इस दुनिया में, जिनसे हम हैं अनजान नहीं
पर किसी भी रिश्ते का आज करता कोई सम्मान नहीं,
अपनी इस छोटी कोशिश से, एक नये रिश्ते का ऐलान करो
फिर खून का रिश्ता जुड़ जाएगा पहले तुम रक्तदान करो।

पढ़िए कविता :- भारत को स्वच्छ बनाना है।

आपको रक्तदान दिवस पर यह कविता कैसी लगी? हमें अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर बतायें।

धन्यवाद।

qureka lite quiz

आपके लिए खास:

2 comments

Avatar
Satyaprakash Arya अप्रैल 23, 2018 - 6:54 पूर्वाह्न

बहुत ही मार्मिक कविता है, मैंने भी अभी तक 99 वें बार रक्तदान कर चुका हूं 23 जून को 100वां रक्तदान करूंगा।

Reply
Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh अप्रैल 23, 2018 - 5:38 अपराह्न

सुन कर बहुत हर्ष हुआ सत्यप्रकाश आर्य जी। बहुत ही कम लोग ऐसे होते हैं जो दूसरों के बारे में सोचते हैं। आप जैसे लोग ही हैं जिनकी वजह से दुनिया मे इंसानियत अभी तक जिंदा है। आपको मेरा हृदय से कोटि-कोटि प्रणाम।

Reply

Leave a Comment

* By using this form you agree with the storage and handling of your data by this website.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More