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जिंदगी क्या है – जिंदगी पर कविता | Zindagi Poetry In Hindi Poem On Zindagi

by Sandeep Kumar Singh

जिंदगी क्या है ? ( Zindagi Poetry In Hindi ) जी हाँ दोस्तों, हम सब के मन में ये बात कभी ना कभी जरुर आता है। खासतौर से तब जब हम किसी तरह की परेशानी में फसे हो,जब जीवन दुखदायी हो रही हो, कही से कोई उम्मीद की रौशनी दिखाई ना दे ऐसे समय में अक्सर हम इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करते है, की आखरी ये जिंदगी है तो है क्या? बस ऐसे ही कुछ भावनाओ को कविता के रूप में उतार के मैंने २ कविताए लिखी है जो आपके सामने पेश है… जिंदगी क्या है कवितायें।

जिंदगी क्या है – जिंदगी पर कविता

जिंदगी क्या है - जिंदगी पर कविता

कविता 1. एक किताब है ज़िन्दगी

बनते बिगड़ते हालातों का
हिसाब है जिंदगी,
हर रोज एक नया पन्ना जुड़ता है जिसमें
वो ही एक किताब है जिंदगी।

हर पल एक नया किस्सा,
तैयार रहता है अपना अंत पाने को,
ग़मों के दौर में खुशियों की
राह 
तकते हैं कई लोग,
तड़पते हैं पेड़ और पंछी पतझड़ में
जैसे 
बसंत पाने को।

कभी कड़ी धूप सी परेशानियाँ
जलाती रहती हैं दर्द की एक आग सीने में,
कभी खुशियों में आनंद मिलता है तो
खुशबू आती है पसीने में,
मजबूरियों का सिलसिला
चलता रहता है सबकी राहों में,
बदल देते हैं वो शख्स कायनात अपनी
होती है जान हौसलों की जिनकी बाहों में।

छिपा कर रखती है कई राज अनजाने से
कहने को वो हिजाब है जिंदगी
हर रोज एक नया पन्ना जुड़ता है जिसमें
वो ही एक किताब है जिंदगी।

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कविता- २. ज़िन्दगी का राज किसने पाया है

कभी धूप कभी छाया है
कभी सत्य कभी माया है
बीत रही इस जिंदगी का
राज़ किसने पाया है?

कभी आस कभी विश्वास है
खुशदिल है कभी उदास है ,
महफ़िलों में नजर नहीं आती है
तन्हाई में दुश्मन जैसे पास है,
कभी हंसाया है इसने
कभी जी भरकर रुलाया है,
बीत रही इस जिंदगी का
राज किसने पाया है?

किसी के लिए सरताज है जिंदगी
कभी दो वक़्त की रोटी की मोहताज है,
कोई रो-रो कर निकाल रहा है
किसी के लिए एक बिंदास अंदाज है जिंदगी
कोई ठोकरों से टूट गया है देखो
किसी ने दूसरों की जिंदगी को सजाया है
इस बीत रही जिंदगी का
राज किसने पाया है?

नफरत की आग लिए दिल में
जलते रहते हैं कई लोग
और कुछ
खुशियों की दवाई बाँट रहे हैं
मिटाने को ग़मों के रोग,
जिंदगी ने अपने रूप से हमें
इस तरह से मिलाया है,
इस बीत रही जिंदगी का
राज किसने पाया है?

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आपको ये कविता ( Zindagi Poetry In Hindi ) जिंदगी क्या है कैसे लगी? आपके क्या विचार है जिंदगी के बारे में? अपने विचार हमें कमेंट के माध्यम से जरुर बताये.. धन्यवाद ।

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70 comments

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Manjeet Nishad January 13, 2022 - 7:40 AM

जीना सिर्फ जिंदगी नहीं है जिंदगी में कुछ पाना भी जिंदगी है

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Shrirang G Chaudhari September 17, 2021 - 11:08 AM

बहोत बढ़िया सर जी, जिंदगी पर बहोत अच्छी कविता लिखी आपने

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Anjali June 19, 2020 - 8:40 PM

Very useful and helpful poem

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sunil May 21, 2020 - 7:59 PM

bahot accha likha hai apne

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 23, 2020 - 12:51 PM

Thank You Sunil Ji….

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Anmol March 26, 2019 - 8:07 PM

Best poem

Reply
Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 2, 2019 - 1:23 AM

Thanks Anmol ji

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Jagdish thakur July 27, 2022 - 4:13 PM

Jindgi jabardast h, eshe jabardasti na jiye,… Jabardast tarike se jiye

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Ghanshyam December 2, 2018 - 4:47 PM

Thank u sir best poem

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh December 2, 2018 - 10:21 PM

घनश्याम जी आपका भी धन्यवाद….

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Shivani Rajput October 24, 2018 - 10:21 PM

बहुत अच्छी …. कविता

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh October 26, 2018 - 2:20 PM

धन्यवाद शिवानी जी।

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Santosh Kumar October 4, 2018 - 9:26 PM

Sir,,
Bahut kuchh sikhati hai ye aapki Kavita…
Thanks u so much…

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Shaklain mustak July 28, 2018 - 3:08 AM

सर अपने जो इस कवित के माध्यम से कहा है लाजवाब लाजवाब है। यही तो जिंदगी है।
सर आपसे अनुरोध है कि एक परेशानी पर कविता लेखे।

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh July 28, 2018 - 9:18 AM

धन्यवाद शकलैन मुस्ताक जी। आपका अनुरोध जल्द ही स्वीकार होगा। इसी तरह हमारे साथ बने रहिये।

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Pavan bharti July 14, 2018 - 7:09 AM

किसी के आने जाने से life रुकती नही कभी,
इसी का नाम है जीन्दगी

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh July 15, 2018 - 10:40 AM

जी पवन जी इसी का नाम जिंदगी है।

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यशवंत कुमार June 27, 2018 - 2:06 AM

बहुत बढिया कविता

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh June 27, 2018 - 3:35 PM

धन्यवाद यशवंत कुमार जी।

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Nishipadma Nanda June 19, 2018 - 1:21 PM

bahutaeeeeeeeeeeeeeeeeeee aacha

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh June 19, 2018 - 2:24 PM

Dhanywaad Nishipadma Nanda ji…

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Rajesh Deshmukh June 10, 2018 - 9:03 PM

Sir हमें आपकी Blog बहुत अच्छा लगा आपने जिंदगी को बहुत अच्छे तरीके से Difine kiya hai

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh June 11, 2018 - 1:36 PM

धन्यवाद राजेश देशमुख जी।

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गोतम चन्द दक March 10, 2018 - 9:16 AM

जीवन की सच्चाई अच्छी लगी FB पर शेयर की आपका नाम Comment में लिखा क्षमा करें और भी शेयर करूंगा

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh March 10, 2018 - 7:38 PM

हाहाहा…..गौतम चंद जी कोई बात नहीं आप ने मेरा नाम लिख दिया इतना ही बहुत है मेरे लिए। बहुत-बहुत धन्यवाद आपका….

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Saqlain February 26, 2018 - 10:58 AM

zindagi kisi ke liye Jannat Ka Bag hai,
Kisi ke liye jahannam ki agg hai
Kisi ke liye waqt kate nhi kt ta
Kisi ke liye khud ke liye wqt nhi
Kisi ke liye zindgi majboori aur zimmedariyo ka naam hai
Kisi ke liye zindagi chakti mahkta kwab hai
Kisi ke liye zindgi saans lena dushwar hai
Kisi ke liye zindagi gulab hai.

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh February 27, 2018 - 8:59 PM

बहुत बढ़िया Saqlain जी…..

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niraj kumar February 14, 2018 - 4:38 PM

Sandeep sir bahut aacha likhhe h aap.

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh February 15, 2018 - 8:44 AM

धन्यवाद नीरज कुमार जी।

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राजेश January 3, 2018 - 9:11 AM

बहुत खूब क्या कहने बेहद उम्दा नायाब बेमिसाल व लाजवाब रचनाएँ ????

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh January 3, 2018 - 9:56 PM

धन्यवाद राजेश जी….

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Kapil chaudhary December 27, 2017 - 1:04 PM

ise maine likha h kaisi aap bta skte ho

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh December 27, 2017 - 5:16 PM

Kyunki ye abhi kahi aur available nhi hai ya fir logo ki najron me nhi aya. Fact ye hai jo cheej kisi dwara pahle dikhayi jaati jai usi ki maan lee jaati hai.

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Kapil chaudhary December 27, 2017 - 1:02 PM

Bante bigdte halato Ka aagaz hai jindki..
Har roj badlne ke liye ek badlaav hai jindki..
Bachpan se budhape tak jeene ke liye ek Raj hai jindki..
sapno ko haqiqat main badlne ke liye ek Aas hai jindki..
gareebo ki galiyon main bdi badnaam hai jindki..
Do dilo ke milan ke liye ek Mukaam hai jindki..
Bhagwaan se mila ek vardaan hai jindki..
kisi ke liye nafrat toh kisi ke liye bdi mahaan hai jindki..
Behisab baate krne wali ek Aawaj hai jindki khud ko badalne ke liye ek Badlaav hai jindki…

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Ajay Tripathi December 8, 2017 - 5:54 PM

Bahut sundar bhaiya ji

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh December 9, 2017 - 7:17 PM

धन्यवाद अजय त्रिपाठी जी।

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soheel November 14, 2017 - 6:47 PM

sir aap ki kavita ka jawab nahi ye kavita la jawab hai. sir

Reply
Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh November 14, 2017 - 7:40 PM

धन्यवाद soheel जी।

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Anup Bhardwaj October 7, 2017 - 10:52 AM

आपने बहुत अच्छी कविता लिखी है जिसको पड़कर बहुत से लोगो का तरीका पता चल जायेग की ।
*जिंदगी क्या है*

Reply
Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh October 7, 2017 - 10:59 AM

जी धन्यवाद अनूप भरद्वाज जी।

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Anup Bhardwaj October 7, 2017 - 10:45 AM

जिंदगी एक खुली किताब है ।
जिसको संभालना हमारे हाथों में है
नही तो दीमक लग जाती है।

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Anup Bhardwaj October 7, 2017 - 10:39 AM

सही कहा
।।जिंदगी एक खुली किताब है।।
जो हवा के साथ साथ up down होती रहती है।

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rajan kumar September 28, 2017 - 5:53 AM

Hame abhi pata chala Ki jindagi ek khuli kitab hai

Reply
Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh September 28, 2017 - 7:27 PM

जी सही कहा आपने, जिदगी एक ऐसी खुली किताब है जिसमे आप अपनी मेहनत की कलम से अपनी तकदीर लिख सक सकते हैं।

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Ranjan August 7, 2017 - 8:26 AM

Very very nice

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh August 7, 2017 - 8:53 AM

Thank you very much Ranjan ji…

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poonam July 17, 2017 - 8:55 PM

Very nice

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh July 17, 2017 - 10:36 PM

धन्यवाद Poonam जी।

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Roshan July 11, 2017 - 7:19 PM

ये जिंदगी जीने का सही मायने बता ती है

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Ankit June 14, 2017 - 9:12 AM

Super…… Sir ji

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh June 14, 2017 - 9:51 AM

Thanks Ankit ji…

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janardan Dixit April 29, 2017 - 10:46 PM

wah kya bat hai… aap jaiso ko padana hi jindagi hai….

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 30, 2017 - 7:45 AM

ये तो आपका बड़प्पन है janardan Dixit जी…बहुत बहुत आभार आपका।

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अशु April 21, 2017 - 4:43 PM

आपकी ये कविता इतनी अनमोल है कि शब्दकोष खाली हैं क्या कुछ अनमोल लिखूं………………

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 21, 2017 - 4:56 PM

धन्यवाद अशु जी… एक लेखक के लिए इससे बड़ी तारीफ कुछ नहीं हो सकती…आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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hanif April 14, 2017 - 8:51 PM

Jindagi!!!!!!!

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munim April 4, 2017 - 2:02 PM

Nice poem

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 5, 2017 - 11:40 AM

Thanks Munim ji…..

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Banshidhar April 2, 2017 - 9:47 PM

Nice one broh =b. Thumbs up

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 2, 2017 - 9:49 PM

Thanks Banshidhar bro…..

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sanjubhai January 9, 2017 - 12:09 PM

Kya hai jindgi

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh January 9, 2017 - 12:20 PM

बस यही है जिंदगी sanjubhai.. ..

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Ghanshyam meena December 21, 2016 - 1:52 PM

आज पहली बार अकेला बैठे हुए सोच रहा था । कि यार ये जिंदगी क्या है? तो google पर डाल दिया तो पाया कि अपने जो कविता लिखी वो सही है

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Mr. Genius
Mr. Genius December 21, 2016 - 3:46 PM

धन्यवाद Ghanshyam Meena जी।
जिंदगी को शब्दों का रूप देने में हम कामयाब हो गए। जब किसी रचना को सराहा जाता है तभी वह जीवंत मानी जाती है। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।
इसी तरह हमारे साथ जुड़े रहिये।

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Raju Gupt November 8, 2016 - 8:56 PM

Very….. nice…. poem….
Thank you so much

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Mr. Genius
Mr. Genius November 8, 2016 - 9:14 PM

Thank you for your comment Raju Gupt ji…

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mahendar November 7, 2016 - 11:28 AM

Nice

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Mr. Genius
Mr. Genius November 7, 2016 - 5:57 PM

Thanks Mahendar ji….

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Priya October 28, 2016 - 12:22 PM

Nice Story Of Lfy

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Mr. Genius
Mr. Genius October 29, 2016 - 8:39 AM

Thanks Priya…….

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