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श्री कृष्ण जी पर कविता :- साँवरी सुरतिया नैन कजरारे | Sri Krishna Ji Par Kavita

by ApratimGroup

प्रभु की भक्ति तो सारा संसार करता है। इनके दर्शन भर से ही हर दुःख मिट जाते हैं। ये साथ रहते हैं तो जीवन के सब राह खुल जाते हैं। कान्हा की सुन्दरता पर तो पूरे बरसाने की कन्याएं मरती थीं। आज कृष्ण की सांवली सूरत पर कौन नहीं मरता है। भगवन कृष्ण की उसी सुन्दरता का बखान कर रही हैं कवियत्री इस “ श्री कृष्ण जी पर कविता ” में :-

श्री कृष्ण जी पर कविता

श्री कृष्ण जी पर कविता

साँवरी सुरतिया नैन कजरारे
तेरी अदा, पे हम दिल हारे।

मोर मुकुट पीतांबर सोहे
कान्हा मेरे मन को मोहे।
तेरी तिरछी नजर जादू डारे,
तेरी अदा पे हम दिल हारे।

लटक मटक के जब तू डोले
धड़कन मेरी धक धक बोले।
तेरे  उलझे बाल घूँघरारे।
तेरी अदा पे हम दिल हारे।।

नींद उड़ाये तेरी मुरली का तान
चैन चुराये कान्हा मीठी मुस्कान।
जाने कान्हा क्या तू जादू डारे।
तेरी अदा पे हम दिल हारे।।

तेरे नाम की मेंहदी रचाई
तुझ संग मोहन प्रीत लगाई
मीरा जपती नाम सुबह शाम रे।
तेरी अदा पे हम दिल हारे।

साँवरी सुरतिया नैन कजरारे
तेरी अदा पे हम दिल हारे।

पढ़िए :- कृष्ण प्रेम पर कविता “मेरी तुझ संग प्रीत लग गयी है सांवरे”


केवरा यदु "मीरा"यह कविता हमें भेजी है श्रीमती केवरा यदु ” मीरा ” जी ने। जो राजिम (छतीसगढ़) जिला गरियाबंद की रहने वाली हैं। उनकी कुछ प्रकाशित पुस्तकें इस तरह हैं :-
1- 1997 राजीवलोचन भजनांजली
2- 2015 में सुन ले जिया के मोर बात ।
3-2016 देवी गीत भाग 1
4- 2016 देवीगीत भाग 2
5 – 2016 शक्ति चालीसा
6-2016 होली गीत
7-2017  साझा संकलन आपकी ही परछाई।2017
8- 2018 साझा संकलन ( नई उड़ान )

इसके अतिरिक्त इनकी अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित हो चुकी हैं। इन्हें इनकी रचनाओं के लिए लगभग 50 बार सम्मानित किया जा चुका है। इन्हें वूमन आवाज का सम्मान भी भोपाल से मिल चुका है।
लेखन विधा – गीत, गजल, भजन, सायली- दोहा, छंद, हाइकु पिरामिड-विधा ।
उल्लेखनीय- समाज सेवा बेटियों को प्रशिक्षित करना बचाव हेतु ।

‘ श्री कृष्ण जी पर कविता ‘ के बारे में अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

धन्यवाद।

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