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Rowlatt Act In Hindi | रॉलेट एक्ट 1919 का अर्थ उद्देश्य और इतिहास

by Sandeep Kumar Singh
Rowlatt Act In Hindi

रॉलेट एक्ट का इतिहास | Rowlatt Act In Hindi

रॉलेट एक्ट का भारतीय स्वतंत्रता इतिहास में एक अलग ही स्थान है। यह एक ऐसा कानून था जिसके विरोध में पूरा देश एकजुट हो गया था। यह रॉलेट एक्ट ही था जिसके कारण गांधी जी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष की मुख्यधारा में आये। जलियांवाला बाग़ हत्याकांड की वजह भी यही काला कानून था। आइये जानते हैं आखिर क्या था यह कानून और क्यों हुआ था भारत में इसका विरोध ( Rowlatt Act In Hindi ) ” रॉलेट एक्ट का इतिहास ” में

रॉलेट समिति ( Rowlatt Committee ) का गठन

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत में अंग्रेजों के खिलाफ बहुत सारे आन्दोलन शुरू हो गए थे। युद्ध में व्यस्त रहने के कारण अंग्रेजी सरकार भारत में हो रही उनके विरुद्ध साजिशों पर ध्यान नहीं दे पा रही थी। एक ओर तो वे युद्ध लड़ रहे थे और दूसरी ओर देश में भी युद्ध जैसे हालात बन रहे थे। ऐसे समय में अंग्रेजी सरकार ने खुद को कमजोर पड़ते हुए देख ऐसी रणनीति बनाने की सोची जिससे भविष्य में उनके सामने फिर कभी ऐसी परिस्थिति न आये। विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद 1917 में ब्रिटिश भारतीय सरकार ने इसी समस्या का स्थाई हल ढूँढने के लिए रॉलेट समिति ( Rowlatt Committee ) का गठन किया गया। जिसके अध्यक्ष एक अंग्रेज न्यायाधीश, सिडनी रॉलेट थे।

रॉलेट एक्ट ( Rowlatt Act ) कब पारित हुआ

अंततः 18 मार्च 1919 को दिल्ली में इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल द्वारा भारतीय सदस्यों के भारी विरोध के बावजूद इस कानून को पारित किया गया था।

रॉलेट एक्ट का असली नाम

रॉलेट एक्ट का दूसरा या यूँ कहें कि असली नाम अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम ( The Anarchical and Revolutionary Crimes Act ) था। इस कानून को बनाने वाले अंग्रेज न्यायाधीश, सिडनी रॉलेट ( Sidney Rowlatt ) के नाम से ही इस एक्ट का नाम रॉलेट एक्ट पड़ा। भारतीयों के विरुद्ध बनाए गए इस कानून को “ काला क़ानून ” के नाम से भी जाना जाता है।

रॉलेट एक्ट क्या है

रॉलेट एक्ट ( Rowlatt Act ) डिफेंस ऑफ़ इंडिया एक्ट 1915 ( Defence of India Act 1915 ) का ही सुधरा हुआ रूप था। रॉलेट एक्ट तो 18 मार्च 1919 को लागू हुआ था लेकिन उस से पहले प्रथम विश्व युद्ध में आंदोलनकारियों पर काबू पाने के लिए डिफेंस ऑफ़ इंडिया एक्ट 1915 ( Defence of India Act 1915 ) को अस्थाई तौर पर लागू किया गया था।

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जब अंग्रेजी हुकूमत युद्ध करने में व्यस्त थी तभी भारतीय आंदोलनकारी अंग्रेजों के दुश्मनों के साथ मिल कर देश में उनके शासन को कमजोर करने की कोशिश कर रहे थे। युद्ध में व्यस्त होने के कारण अंग्रेज भारत में उनके खिलाफ हो रही साजिशों पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे। इस समस्या को तुरंत हल करने के लिए उन्होंने डिफेंस ऑफ़ इंडिया एक्ट 1915 ( Defence of India Act 1915 ) लागू किया।

इस एक्ट के तहत सरकार को बहुत व्यापक शक्तियां प्रदान की गईं जिसके अनुसार वे किसी को भी नज़रबंद और बिना सुनवाई के कैद कर सकते थे। अंग्रेजी सरकार के खिलाफ लिखने, भाषण देने और आंदोलन करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

यह कानून विश्व युद्ध के जारी रहने और युद्ध ख़त्म होने के छः महीने बाद तक के लिए बनाया गया था। ग़दर लहर के असफल होने के बाद इस क़ानून के तहत लाहौर षड्यंत्र केस ( Lahore Conspiracy Case ) नाम के अंतर्गत आंदोलनकारियों पर 9 अलग-अलग केस चलाए गए। यह केस 26 अप्रैल से 13 सितंबर 1915 तक चले।

इसी क़ानून ने पंजाब में ग़दर आंदोलन और बंगाल में अनुशीलन समिति को कुचलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इस कानून का भारतीय आन्दोलनकारियों पर ज्यादा असर न हुआ। और विश्व युद्ध के समाप्ति के बाद तो डिफेंस ऑफ़ इंडिया एक्ट 1915 ( Defence of India Act 1915 ) कानून भी हटा लिया गया था। इसके बाद आंदोलनकारी और भी सक्रिय होकर स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए निरंतर संघर्ष करते रहे। यही समय था जब महात्मा गाँधी भी अफ्रीका से भारत चुके थे। जनता में उनकी लोकप्रियता दिनोंदन बढ़ रही थी। वे अंग्रेजों के विरुद्ध एक अच्छे नेता के रूप में उभर रहे थे।

भारतीयों ने अंग्रेजी हुकूमत को इतना परेशान कर दिया कि उन्हें स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए किये जा रहे आंदोलनों पर नियंत्रण पाने के लिए ही रॉलेट समिति ( Rowlatt Committee ) का गठन कर रॉलेट एक्ट को पारित कर दिया।

( नोट :- यह डिफेंस ऑफ़ इंडिया एक्ट 1915 ( Defence of India Act 1915 ) दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भी लागू किया गया था। )

रॉलेट एक्ट का उद्देश्य

रॉलेट एक्ट ( Rowlatt Act ) लागू कर ब्रिटिश गवर्नमेंट निम्नलिखित अधिकार प्राप्त करना चाहती थी जिस से वह उनके खिलाफ हो रहे हर आन्दोलन को आसानी से दबा सके।

1. ब्रिटिश सरकार को यह अधिकार प्राप्त हो जाए कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाए उसे जेल में बंद कर सके। इस क़ानून के तहत अपराधी को उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने वाले का नाम जानने का अधिकार भी समाप्त कर दिया जाए।

2. राजद्रोह के मुकदमे की सुनवाई के लिए एक अलग न्यायालय स्थापित किया जाना चाहिए।

3. मुकदमे के फैसले के बाद किसी उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

4. राजद्रोह के मुकदमे में जजों को बिना जूरी की सहायता से सुनवाई करने का अधिकार होना चाहिए।

5. सरकार को यह अधिकार होना चाहिए कि वह बलपूर्वक प्रेस की स्वतंत्रता का अधिकार छीन ले और अपनी इच्छा अनुसार किसी व्यक्ति को कारावास दे दे या देश से निष्कासित कर दे।

वास्तव में क्रांतिकारी गतिविधियों को कुचलने के नाम पर ब्रिटिश सरकार भारतीयों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को समाप्त कर देना चाहती थी। इस कानून द्वारा वह चाहती थी कि भारतीय किसी भी राजनीतिक आंदोलन में भाग न ले।

रॉलेट एक्ट के परिणाम

मोहम्मद अली जिन्ना और मदन मोहन मालवीय ने इस कानून के विरोध में इंपीरियल विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया। पूरे देश में हड़तालें होनी लगी। इस कानून के विरोध में महात्मा गाँधी ने राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह आन्दोलन चलाया। यह आन्दोलन रॉलेट सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता है। यही कानून आगे चलकर जलियांवाला बाग़ हत्याकांड का कारण भी बना।

अंत में दमनकारी कानून समिति ( Repressive Laws Committee ) की रिपोर्ट  के बाद रॉलेट एक्ट ( Rowlatt Act ) को मार्च, 1922 में निरस्त कर दिया गया था।

( Rowlatt Act In Hindi ) ” रॉलेट एक्ट का इतिहास ” में यदि कोई जानकारी छूट गयी हो तो कृपया हमें जरूर बताएं। ( Rowlatt Act In Hindi ) ” रॉलेट एक्ट का इतिहास ” से संबंधित कोई प्रश्न यदि आपके मन में है तो कमेंट बॉक्स के माध्यम से हमें जरूर बताएं।

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धन्यवाद।

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