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रक्षा बंधन पर कविता :- राखी पर बाल कविता हमें बताओ चंदा मामा

by Sandeep Kumar Singh

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इस दुनिया में भाई-बहन का रिश्ता सबसे अनूठा है। दोनों में तकरार भी होती है और प्यार भी होता है। ऐसे में ऐसे भी भाई बहन हैं जिन्हें हम जानते हैं लेकिन उनकी राखी का जिक्र कहीं नहीं होता। इस बाल कविता में हमने उसी रिश्ते के बारे में बताने की कोशिश की है। ये रिश्ता है धरती माँ, गौ माता, बिल्ली मौसी और चंदा मामा का। चंदा मामा से क्या शिकायत की जा रही है आइये पढ़ते हैं रक्षा बंधन पर कविता “हमें बताओ चंदा मामा” में :-

रक्षा बंधन पर कविता

रक्षा बंधन पर कविता

दूर देश में रहने वाले
अपनी धुन के तुम मतवाले
सारा दिन गायब रहते हो
सारी रात जागने वाले,
भला रात तक हमें बताओ
धरती माँ कैसे जागेंगी?
हमें बताओ चंदा मामा
माँ राखी कैसे बांधेंगी?

देखते राह तुम्हारी जब
रजनी अंधेरी आएगी
इंतजार तब करते-करते
बिल्ली मौसी सो जाएंगी,
भला रात तक हमें बताओ
मौसी जी कैसे जागेंगी?
हमें बताओ मौसी तुमको
फिर राखी कैसे बांधेंगी?

गौ माता ने हमें बताया
जब अंबर आते हैं तारे
आँख नहीं खुलने देती फिर
पास बैठती नींद हमारे,
भला रात तक हमें बताओ
गौ माता कैसे जागेंगी?
हमें बताओ चंदा मामा
राखी माँ कैसे बांधेंगी?

” रक्षा बंधन पर कविता ” आपको कैसी लगी? कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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धन्यवाद।

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