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पिता को श्रद्धांजलि कविता – दिवंगत पिता की याद में कविता | Pita Ki Yaad Me Kavita

by Sandeep Kumar Singh

Pita Ki Yaad Me Kavita – माँ की महिमा का वर्णन तो सारा जहान करता है लेकिन पिता के कर्त्त्वयों का गुणगान कोई-कोई ही करता है। अक्सर पिता के रहते शायद किसी को उनकी कही बात बुरी लग जाती हो। पर उनके हमें छोड़ जाने के बाद हमें उनकी बातें बहुत याद आती है। फिर पता चलता है कि जिम्मेवारियों का बोझ कितना भारी होता है। एक परिवार को चलाना कितना मुश्किल होता है। जिसे पिता ख़ुशी-ख़ुशी चलाता है। वह परिवार कि खुशियों के आगे अपनी ख़ुशी कुर्बान कर देता है। बस उन्ही यादों और जज्बातों को समाहित कर के मैंने ये कविता ‘ पिता को श्रद्धांजलि ‘ लिखी है। आइये पढ़ते हैं कविता :- पिता को श्रद्धांजलि

Pita Ki Yaad Me Kavita
पिता को श्रद्धांजलि

पिता को श्रद्धांजलि :

आपकी कमी खलती है मुझे
ये खालीपन तड़पाता है,
बस यूँ ही यादें दिल में समेटे
ये वक़्त गुजरता जाता है।

अब पता चलता है कि
जिम्मेवारियों का बोझ कितना भारी है,
खुद से ज्यादा
अपनों की खुशियाँ प्यारी हैं,
दौड़ाने पड़ते हैं कदम
पकड़ने को जिंदगी कि रफ़्तार,
आज गुजर रहा है और
कल की तैयारी है।

आपकी मजबूरियों का
मुझे अब एहसास होता है
दुनिया होती है मतलबी और
घर का हर शख्स ख़ास होता है
माँ के बाद पिता ही
समझता है ख़ामोशी औलादों की
मुश्किलों से बचाने के लिए
पिता हिम्मत की दीवार होता है।

हर डांट में प्यार जो रहता था
वो याद बहुत अब आता है
हर बीता लम्हा अब तो बस
आँखों में आंसू लाता है
तस्वीर बसी है दिल में जो
जीने का हौसला देती है
इसी तरह से बस अब तो
ये वक़्त गुजरता जाता है।

आपकी कमी खलती है मुझे
ये खालीपन तड़पाता है,
बस यूँ ही यादें दिल में समेटे
ये वक़्त गुजरता जाता है।

देखिये इस कविता का विडियो :-

पिता को श्रद्धांजलि कविता | Pita Ko Shradhanjali Kavita | पिता की याद कविता | Shradhanjali Status

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इस कविता ‘ पिता को श्रद्धांजलि ‘ ( Pita Ki Yaad Me Kavita ) के बारे में अपनी राय हम तक अवश्य पहुंचाएं। आपके विचार हमारे लिए बहुमूल्य हैं।

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धन्यवाद।

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63 comments

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Sachin Sharma November 30, 2021 - 4:22 PM

आँखे नम हो गयीं, बहुत ही सुन्दर कविता

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Navin jain June 19, 2022 - 2:43 AM

शानदार कविता लिखी है आपने दिल को छू गयी है।।

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Sunil Kumar Pandey July 30, 2021 - 8:47 PM

Bahut sundar

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh August 12, 2021 - 2:42 PM

Thanks Sunil Kumar ji

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A k Mishra May 28, 2021 - 9:07 PM

बहुत ही शानदार ????????

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Rahul mor July 25, 2020 - 12:16 AM

Mere pitaji abhi 18/05/2020 ko mujhe akela kar Gaye main bahot pareshan hun

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Digeshwar singh February 10, 2020 - 8:54 PM

Very nice

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महेंद्र सिंह पड़ियार January 3, 2020 - 6:54 PM

बहुत शानदार कविता लिखी है आपने दिल को छू गयी है।।

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Jyoti Sharma December 9, 2019 - 11:32 AM

Behtareen kavitae…heart rendering…keep it up…

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Ms. Elizabeth Lewis September 21, 2019 - 7:01 PM

Aapke kavita ki panktiyan dil ko chhoo gai…bahut sunder rachana…..

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Manish Charaniya August 19, 2019 - 5:06 PM

धन्यवाद ????????????????

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Rajiv May 30, 2019 - 3:22 PM

Mere pitaji ka 27/3/19 ko swargvas ho gaya. Hum unhe bahut miss kar rahe hai
Kuch achha nahi lagta

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Pradeep Umariya March 14, 2019 - 7:11 PM

Bahut Hi Sunder kavita hai…..
Pita ka na hona kya hota he, pita ke jane ke baad hi samajh aata he.
Very nice sir ji…

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh March 15, 2019 - 4:35 PM

धन्यवाद प्रदीप जी….

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Raj uikey March 12, 2019 - 5:34 PM

Aap ki poem ko padhkar Kar meri ankh ke aansu ruk nahi rahe the aisa lag raha tha mere papa mere aas paas hi Kahi moujud hai aur mujhe se Kah rahe beta chinta mat Kar Mai Hu na pita par itni acchi poem likhne aap Ka bahut bahut dhanywad sir

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Tarun Kumar Pandey December 21, 2018 - 1:57 AM

Bahut achhe Kavita h mere pita ji bi ab es diniya me ni h pr apki Kavita ne ankho me anshu la diya special thanks to you

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Surbhi katitar December 15, 2018 - 7:32 PM

Namaste Sandeep gi Aapne sach me pita ke bare me bahut Acha Likha hai Aapne Sahi Kaha ki maa ki mahatwata ko to sab jante hai par pita ke mahtwa ko koi koi hi samajte hai.

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh December 17, 2018 - 9:17 PM

धन्यवाद Surbhi Katitar जी।

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Anuradha November 22, 2018 - 3:41 PM

Namaskar Sandeep ji ..aaj mere pitaji ka janmdin hai ..aap ki kavita padhi toh aankho se apne ashru rok na pai….bhut sunder kavita !
Dhanyawad .

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh December 2, 2018 - 10:12 PM

जी अनुराधा जी पिता के बारे में कुछ भी लिखा जाए वो कम ही होगा….लेकिन इसका अहसास हमें उनकी गैरहाजिरी में ही होता है….

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आशीष पाठक November 4, 2018 - 10:05 AM

2/11/18 को हमारे पिता जी का निधन होगया आज आप की लिखी लाइने पढ़ कर आँखो से आशु बन्द नही हो रहे .????

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh November 4, 2018 - 7:35 PM

आशीष पाठक जी हमारी संवेदनाएं आपके साथ हैं। एक पिता का महत्व उसकी गैर हाजिरी में ही हमें महसूस होता है। इसलिए समय रहते हमें अपने माता पिता के साथ जी भर कर जी लेना चाहिए। पिता सचमुच भगवान का दूसरा रूप होता है।

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Sachin Yadav November 2, 2018 - 3:31 PM

आज मैं अपने पापा को मिस कर रहा हूं
I love you Papa

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh November 4, 2018 - 7:31 PM

Thanks Sachin ji…

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शैलेंद्र सिंह October 15, 2018 - 8:40 PM

संदीप जी बहुत ही सुन्दर लिखा है आप ने आप के एक एक शब्द दिल में उतार गये आप के एक एक शब्द दर्शते है कि पिता की जगह कोई भी नही ले सकता है आज मैं अपने पापा को बहुत ही मिस करता हूँ और बहुत ही प्यार करता हूँ लेकिन ये बात मैं उनसे नही कह सकता हूँ

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh October 16, 2018 - 10:25 AM

धन्यवाद शैलेन्द्र सिंह जी।

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Sandhya jaiswal June 17, 2018 - 12:40 PM

Very nice poem Mikey aapney father ko bahut yaad aayi

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh June 18, 2018 - 7:29 AM

Thanks sandhya jaiswal ji..

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Amrutkumar June 17, 2018 - 10:57 AM

पिता जी पर आपकी सभी कविता ये बहुत ही मार्मिक है । पिता की याद आ जाती है

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh June 18, 2018 - 7:27 AM

धन्यवाद अमृत कुमार जी।

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Abhishek June 8, 2018 - 11:46 PM

I miss my papa

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Amit meena May 24, 2018 - 8:29 PM

Dil chhune wali kavita bahut sunder sir

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 24, 2018 - 8:33 PM

धन्यवाद अमित मीना जी।

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Deepak johari April 22, 2018 - 12:42 PM

Bahut sundr ji dil ko gad gad kr diya apki ye kavita pad kar

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 23, 2018 - 5:37 PM

धन्यवाद दीपक जोहारी जी।

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चंचलेश April 19, 2018 - 12:56 PM

आपकी कविता पढ़कर मैंने और कुछ पल अपने पिता जी के साथ बिता लिया सर। आज मेरे पिता की आठवी पुण्यतिथि है। इन आठ सालों में मेरे पिता के आदर्शों में चलकर मुझे पता चल गया की पिता के त्याग, परिश्रम और परिवार की जिम्मेदारियां निभाना हर किसी के बस की बात नही है। ऐसा लगता है मेरे पिता आज भी मेरे साथ हैं। और मुझे सत्य असत्य का मार्ग दिखाते रहते है।

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 19, 2018 - 8:35 PM

चंचलेश जी यह एक बहुत बड़ी बात है कि हम हमारी कविता ने आपकी भावनाओं को छुआ। एक कवि की रचना तब सफल हो जाती है जब वह पाठक के दिल को छू जाती है। सराहना के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद चंचलेश जी।

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RAMESH KUMAR PARMAR April 13, 2018 - 12:20 PM

मेरे पिताजी अब इस दुनिया में नहीं हैं , मैं इन लाइनों को पढ़कर अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था
लेखक को मेरा सादर नमन !
I LOVE YOU PAPA ( MY LIFE IS MY MOM )

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 16, 2018 - 6:11 PM

धन्यवाद रमेश कुमार जी।

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RAMESH KUMAR PARMAR April 20, 2018 - 3:32 PM

hello sir please give me your whatshap number.

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 20, 2018 - 6:13 PM

रमेश कुमार जी हमारा व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 है।

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Lalmohan Anand April 4, 2018 - 12:51 PM

Bahut achchha kawita hai

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 5, 2018 - 10:34 AM

Thanks Lalmohan Amanda ji.

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Sunil Valvi January 27, 2018 - 9:49 PM

Ekdam hai apke vichar

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh January 29, 2018 - 1:01 PM

Thanks Sunil Valvi

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Lokpati dubey January 11, 2018 - 10:53 AM

पिता की यादें सर्च किया तो ये कविता मिली , अच्छी कविता है

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh January 11, 2018 - 11:16 AM

धन्यवाद लोकपति दूबे जी।

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manoj kumar January 8, 2018 - 4:53 PM

Sir ji i miss you my papa me akele me jab bhi hota hu ropadta hu verry nice poem sir

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh January 8, 2018 - 6:57 PM

मनोज कुमार जी, पिता का प्यार होता ही ऐसा है जिसका एहसास बाद में होता है।

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Deepak jiprot December 7, 2017 - 1:36 AM

Mere pappa ko aaj 7 12. 2017. Ko 14 saal hue. Aaj un ki kami bahut khal rahi hai

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh December 7, 2017 - 1:49 PM

Deepak jiprot ji माँ-बाप की कमी को तो कोई दूर नहीं कर सकता। लेकिन वो रहते सदा हमारे साथ हैं।

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Madan November 30, 2017 - 11:43 PM

पिता की यादें सर्च किया तो ये कविता मिली , अच्छी कविता है

Reply
Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh December 1, 2017 - 4:55 PM

धन्यवाद Madan जी।

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Geeta sahu October 14, 2017 - 11:40 AM

Mere pita ko aaj 1 saal ho gye vo ab is sansaar me nhi hai,,,
aapki ye kavita padhkr mai apne aansu nhi rok pai
jis trah ye kavita aapne likhi hai
mere pita bhi usi trh the
is kavita ko padhkr mujhe aisa prateet hua ki
ye hmari hi kahani hai,,,,
dhnywaad sir jee
koti koti abhinandan

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh October 14, 2017 - 3:23 PM

गीता साहू जी एक लेखक के लिए ये बहुत बड़ी बात होती है कि पाठक उनकी रचनाओं में खुद का जीवन देख पायें। आपके पिता जी के लिए हमारी सहानुभूति आपके साथ है। कविता की सराहना करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

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यशवंत September 16, 2017 - 1:00 PM

मेरे पिताजी अब इस दुनिया में नहीं हैं , मैं इन लाइनों को पढ़कर अपने आंसू नहीं रोक पा रहा था
लेखक को मेरा सादर नमन !

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh September 16, 2017 - 10:43 PM

यशवंत जी हमारी सहानुभूति आपके साथ है। आपके पिता आपके आस-पास ही हैं। बस महसूस कर के देखिए।

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sachin yadav August 22, 2017 - 9:05 PM

Hello sir..
Hame bahut accha laga apki peom padhkar bahut accha likha Hai apne
Peom padhkar bahut yad ayi pita ji ki

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh August 23, 2017 - 1:09 PM

धन्यवाद सचिन जी, ये तो बस शब्दों और भावनाओं का संगम है जो दिल को छू जाता है।

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Raj yadav August 10, 2017 - 2:11 PM

Sandeep bhai sahab I do not have a word about how I will express my intention to your writing. Brother, this is the best poem of my life. Thank you very much brother.

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh August 10, 2017 - 6:43 PM

Thank to you also brother….aap jaise hi bhaiyon ki shabashi se hi ye sab likh pata hun ….. isi tarah humare sath bane rahen….dhanywad…

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yogesh July 18, 2017 - 7:01 PM

Very nice sir ji

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh July 20, 2017 - 3:50 PM

धन्यवाद योगेश जी।

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