Home हिंदी कविता संग्रहप्रेरणादायक कविताएँ पेड़ से लिपटी बेल पर कविता – नव विश्वास जगाती बेल | Inspirational Poem

पेड़ से लिपटी बेल पर कविता – नव विश्वास जगाती बेल | Inspirational Poem

सूचना: दूसरे ब्लॉगर, Youtube चैनल और फेसबुक पेज वाले, कृपया बिना अनुमति हमारी रचनाएँ चोरी ना करे। हम कॉपीराइट क्लेम कर सकते है

Ped Se Lipti Bel Par Kavita बालोपयोगी ” पेड़ से लिपटी बेल पर कविता ” में पेड़ से लिपटी एक बेल के माध्यम से जीवन को उल्लास और उमंग के साथ जीने की सीख दी गई है। एक पतली – सी बेल,बदलते मौसम की मार सहकर भी जीवन को हँसते – हँसते बिताती है। यह अपने जीवन के छोटे होने की चिन्ता कभी नहीं करती और जब तक जीवित रहती है औरों को फूल और छाया के रूप में प्रसन्नता देने का प्रयास करती है। बेल को देखकर हमें नए विश्वास के साथ जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। 

Ped Se Lipti Bel Par Kavita
पेड़ से लिपटी बेल पर कविता

पेड़ से लिपटी बेल पर कविता

देखो ! कैसे लिपट पेड़ से
ऊपर बढ़ती जाती बेल,
नहीं देखती पीछे मुड़कर
नभ से हाथ मिलाती बेल।

सर्दी गर्मी वर्षा से भी
तनिक नहीं घबराती बेल,
तेज हवा के झोंकों में तो
मस्ती से लहराती बेल।

चिड़िया आ जब नीड़ बनाती
तब मन में हर्षाती बेल,
मधुमक्खी भँवरे जब आते
फूली नहीं समाती बेल।

थोड़ी – सी भी जगह मिले तो
अपने को फैलाती बेल,
जिधर मोड़ दो मुड़े उधर को
बच्ची – सी मुस्काती बेल।

हाथ हिला कोमल पत्तों के
हमको पास बुलाती बेल,
शीतल छाया से तन मन की
सारी थकन मिटाती बेल।

इसको काटो – छाँटो तो भी
फिर से है हरियाती बेल,
चार दिनों के जीवन में भी
हँस – हँस फूल खिलाती बेल।

मुरझाने से कभी न डरती
गीत खुशी के गाती बेल,
जीवन को जी – भर जीने का
नव विश्वास जगाती बेल।

” पेड़ से लिपटी बेल पर कविता ” आपको कैसी लगी? अपने विचार कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

पढ़िए यह बेहतरीन प्रेरणादायक रचनाएं :-

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ क्लिक करें।

धन्यवाद।

qureka lite quiz

आपके लिए खास:

Leave a Comment

* By using this form you agree with the storage and handling of your data by this website.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More