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परीक्षा पर हास्य कविता :- परीक्षा के दिनों में विद्यार्थियों की हालत पर हास्य कविता

by Sandeep Kumar Singh


परीक्षा सिर पार आती है तो सबके तोते उड़ जाते हैं। जिन्होंने सारा साल परिश्रम किया होता है उनके लिए परीक्षा कुछ खास तकलीफदेह नहीं होती। जिन्होंने सारा वर्ष कभी किताब ही न उठायी हो उनके लिए तो जैसे कोई मुसीबत बिना बताये आ गयी हो, ऐसा हाल होता है। ऐसे में कोई भगवान को याद करता है तो किसी के सिर पे परीक्षा के कारन सिर दर्द होता रहता है परन्तु फिर भी सभी लोग किताब उठा कर पढ़ते हैं। हाँ, कुछ ऐसे भी होते हैं जो पढ़ने की बस एक्टिंग करते हैं। तो आइये ऐसे ही हालातों का जायजा लेते हुए हम पढ़ते हैं परीक्षा पर हास्य कविता :-

इस कविता का विडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें ( कविता पढ़ने के लिए नीचे जाएँ ) :-

परीक्षा पर हास्य कविता | Funny Poem On Exam In Hindi | Pariksha Par Hasya Kavita | हिंदी हास्य कविता

परीक्षा पर हास्य कविता

परीक्षा पर हास्य कविता

आयी परीक्षा सिर पर देखो
मुंह से निकला हाय राम,
बने किताबी कीड़ा हैं सब
छोड़ के देखो सारे काम।

रिश्तेदारों को है चिंता
हमसे ज्यादा खाय रही
फेल हुयी थी चुन्नी अपनी
बता के बुआ डराय रही,
बस उनके चक्कर में अब तो
जीना अपना हुआ हराम
बने किताबी कीड़ा हैं सब
छोड़ के देखो सारे काम।

नींद न आती रातों को
उल्लू बन-बन जाग रहे
समझ न आये कौन दिशा में
दिमाग के घोड़े भाग रहे,
सिर में ऐसी दर्द छिड़े है
भगा सके न झंडू बाम
बने किताबी कीड़ा हैं सब
छोड़ के देखो सारे काम।

पढ़िए :- किताब के महत्व पर कविता।

जादू टोना, तंतर मंतर,
काम न कुछ भी करता है
इसके जाल में जो भी फंसता
वो जीता न मरता है,
मंदिर मस्जिद जहाँ भी जाओ
आता न मन को आराम
बने किताबी कीड़ा हैं सब
छोड़ के देखो सारे काम।

जाने कौन वो मानव था
हमसे दुश्मनी जिसने निभायी
जाने किस बदले की खातिर
उसने फिर परीक्षा बनायी,
मिल जाए जो हमें कहीं वो
कर दें उसका काम तमाम
बने किताबी कीड़ा हैं सब
छोड़ के देखो सारे काम।

चैन कहाँ मिल रहा किसी को
किसे मिल रहा है विश्राम
भागा दौड़ी मची हुयी है
कुछ बैठे जपते हैं नाम,
बनेगा क्या अब लगी हैं चिंता
सोचें बस यही सुबह और शाम
बने किताबी कीड़ा हैं सब
छोड़ के देखो सारे काम।

पढ़िए अप्रतिम ब्लॉग की ये बेहतरीन हास्य रचनाएं :-

परीक्षा पर हास्य कविता आप सब को कैसे लगी? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिख कर बताएं।

धन्यवाद।

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22 comments

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Sushant kumar May 23, 2020 - 11:44 PM

Bhut kub really funny kabit a

Reply
Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 27, 2020 - 2:11 PM

धन्यवाद सुशांत कुमार जी..

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Gourav Patel November 25, 2019 - 7:28 PM

Sir kavita ke ras par bhi kavita banayo. Ham Sab ko ras yaad karne me aacha hoga

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Tasneem November 21, 2019 - 6:04 PM

Who is poet of this poem

Reply
Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh November 21, 2019 - 6:10 PM

I'm the poet of this poem….

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Vandana aggarwal October 15, 2019 - 4:02 PM

Nice poem for school students

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Arti sachan September 27, 2019 - 6:07 PM

Bahut accha likhte ho

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Shweta September 3, 2019 - 8:39 PM

Funny poem✨???? ???? ????
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Ujjwal rautela July 19, 2019 - 5:43 PM

Nice ???? poem maja hi aa gaya parkar

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Anjali June 27, 2019 - 1:05 PM

बहुत ही मज़ेदार

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh July 16, 2019 - 2:56 PM

धन्यवाद अंजली…

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Mansimran October 22, 2018 - 10:34 PM

Very very funny

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh October 24, 2018 - 10:42 AM

Thanks Mansimran ji..

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लोकेश इंदौरा October 6, 2018 - 9:00 PM

अच्छा लिखे हो संदीप जी, हिंदी हास्य कवितायें पढ़ने व लिखने का हमें भी जुनून है जो आप स्वयं देख या पढ़ सकते हैं।

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Disha October 1, 2018 - 6:37 PM

Mst h bhai,????☺️☺️☺️☺️

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh October 1, 2018 - 7:37 PM

Thanks…

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Ayush May 15, 2018 - 7:59 PM

Outstanding spontaneous and hilarious poems.

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 15, 2018 - 9:39 PM

Thanks Ayush Bro….

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RN kaushal April 5, 2018 - 6:56 PM

मुझे अच्छा लगा nice poem

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 11, 2018 - 9:37 PM

धन्यवाद RN kaushal ji…

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Archana saxena February 22, 2018 - 11:01 PM

सिर में ऐसी दर्द छिड़े है
भगा सके न झंडू बाम,bahut badhia likha he sandeepji.school ke din yaad aa gaye.

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh February 24, 2018 - 1:53 PM

धन्यवाद अर्चना जी।

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