Home हिंदी कविता संग्रह नव वर्ष पर कविता :- नए वर्ष की भीनी खुशबू | नए साल पर कविता

नव वर्ष पर कविता :- नए वर्ष की भीनी खुशबू | नए साल पर कविता

सूचना: दूसरे ब्लॉगर, Youtube चैनल और फेसबुक पेज वाले, कृपया बिना अनुमति हमारी रचनाएँ चोरी ना करे। हम कॉपीराइट क्लेम कर सकते है

नव वर्ष पर सभी एक दूसरे को शुभकामना देते रहते हैं और उनकी सुख समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं। ऐसी ही एक शुभकामना आदरणीय सुरेश चन्द्र “सर्वहारा” जी अपनी कविता द्वारा सबको दे रहे हैं। आइये पढ़ते हैं नव वर्ष पर कविता :-

नव वर्ष पर कविता

नव वर्ष पर कविता

हरी भरी हो अपनी धरती
बहे हवा हर दुःख को हरती,
दिन में रवि किरणें सुखकर हों
रहे चाँदनी निशि में झरती।
सदा चमन में खुशियों की ही
चिड़िया रहे चहकती,
नए वर्ष की भीनी खुशबू
हर पल रहे महकती।

रहें सभी आपस में मिलकर
सद्भावों के फूटें निर्झर,
खुशहाली की गंगा आए
दीन दुःखी पीड़ित जन के घर।
मानव – मन में बन्धु भाव की
फसलें रहें लहकती,
नए वर्ष की भीनी खुशबू
हर पल रहे महकती।

घना तिमिर चाहे हो मग में
शूल चुभें कितने ही पग में,
लक्ष्य प्राप्ति की लेकिन आशा
पलती रहे हमारे दृग में।
तूफानों में संघर्षों की
ज्वाला रहे दहकती,
नए वर्ष की भीनी खुशबू
हर पल रहे महकती।

नहीं किसी से वैर भाव हो
घृणा युद्ध के नहीं घाव हो,
शांति सौख्य विश्वास प्रेम का
जग में नित बढ़ता प्रभाव हो।
भौतिकता में सुप्त मनुजता
अब ना रहे बहकती।
नए वर्ष की भीनी खुशबू
हर पल रहे महकती।

पढ़िए :- नए साल पर कविता ‘नया इतिहास रचना है’


‘ शरद ऋतु पर कविता ‘ के बारे में अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे लेखक का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें :-

apratimkavya logo

धन्यवाद।

qureka lite quiz

आपके लिए खास:

Leave a Comment

* By using this form you agree with the storage and handling of your data by this website.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More