नव वर्ष की कविता :- स्वागत करें नव वर्ष का हम | नूतन वर्ष कविता

नए साल के आगमन पर ‘ नव वर्ष की कविता ‘:-

नव वर्ष की कविता

नव वर्ष की कविता

जीवन मे नव दिवस जोड़कर
बढ़ें सफलता की ओर कदम।
नव किरण जगे नव आस जगे
स्वागत करें नव वर्ष का हम।

हुई भूल जो हमसे कुछ भी
उसे बीते वक़्त सा छोड़ दो
भीतर भरा है डर जो अपने
तुम बेड़ियां उसकी तोड़ दो,
भूल निराशा जीवन की अब
आगे बढ़ने का भर तू दम
नव किरण जगे नव आस जगे
स्वागत करें नव वर्ष का हम।

जिसका दिल हो कभी दुखाया
मांग माफ़ी गलती मान लो
मन में सबके प्यार जगाकर
तुम खुद की ख़ुशी पहचान लो
न्याय का मार्ग पकड़ना सीख
हम सहें नहीं किसी के सितम।
नव किरण जगे नव आस जगे
स्वागत करें नव वर्ष का हम।

इस वर्ष भी अपने साथ हैं
साथी बीती यादो के साये
सारे व्यसनों को त्यागे हम
नई राह बस हमको भाये,
एकता का सबको पाठ पढ़ा
समाप्त करेंगे खुद का अहम
नव किरण जगे नव आस जगे
स्वागत करें नव वर्ष का हम।

पाकर अपनों का साथ सदा
दिलों में बढ़ें खुशियां अपार
बाटेंगे प्यार करो कोशिश
चाहे मिलें हों कांटें हज़ार,
हार को दूर भगा राह से
खुद को बनायें जग में सक्षम
नव किरण जगे नव आस जगे
स्वागत करें नव वर्ष का हम।

संकल्प करें हम कुछ मिलकर
सफलता प्राप्त इस वर्ष करें
कुरीतियां जो फैली समाज में
उनको मिटाने में हर्ष करें,
देश हित ही अपना उद्देश्य
विकास में हो यह सदा प्रथम
नव किरण जगे नव आस जगे
स्वागत करें नव वर्ष का हम।

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शिक्षक पर कवितामेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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धन्यवाद।

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