जीवन एक संघर्ष – संघर्षमय ज़िन्दगी पर कविता | Poem On Life

अधिकतर लोग ज़िन्दगी में आने वाली तकलीफों और संघर्षो की शिकायत करते मिलते है। लेकिन वो भूल जाते है की जीवन एक संघर्ष है। बिना संघर्ष के जीवन अधुरा होता है, बिलकुल वैसा ही जैसे बिना नमक के खाना। नमक का अकेले स्वाद लोगो को पसंद नही आता, लेकिन खाने में नमक मिला देने से खाना स्वादिष्ट हो जाता है।

इसी बात को लोगो को बताती, जीवन में संघर्षो के स्थान को बताती संघर्षमय ज़िन्दगी पर ये कविता: जीवन एक संघर्ष आपके सामने पेश है।

जीवन एक संघर्ष

जीवन एक संघर्ष

संघर्ष की चक्की चलती है
मेहनत का आटा पिसता है,
सफलता कि रोटी पकती है
और अपना सितारा चमकता है।

सहारों का उजाला हो कितना
खुशियों तक ही वो टिकता है,
मजबूरियों के फिर अंधेरों में
हिम्मत का शोला दहकता है।

मंजिल हो प्यारी जिसको
वो राहों में न कभी अटकता है,
भूल जाए जो लक्ष्य कभी
वो सारा जीवन भटकता है।

है गर्म हवाओं का डर उसको
जो मखमल में ही पलता है,
उसे अंगारों का भय क्या होगा
जो काँटों पर ही चलता है।

जब दौर है होता गर्दिश का
तो अस्तित्व कहाँ फिर बचता है,
चले जाते हैं आशियाने में पंछी
तूफ़ान में बाज ही उड़ते हैं।

स्वाभिमान जो दिल में हो
ईमान न ये फिर खिसकता है,
न राजा रहे न रंक रहे
यहाँ वक़्त भी कहाँ टिकता है।

बैसाखियाँ छोड़ बहानों की
जो हौसलों से ही चलता है,
होता है अलग वो दुनिया से
इतिहास वही फिर रचता है।

संघर्ष की चक्की चलती है
मेहनत का आटा पिसता है,
सफलता कि रोटी पकती है
और अपना सितारा चमकता है।

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धन्यवाद।

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14 Comments

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