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होली पर छोटी कविताएँ :- होली आई होली आई | Holi Hindi Poems

by Sandeep Kumar Singh

होली, त्यौहार रंगों का और शीत ऋतु को अलविदा कहने का उत्सव। दीपावली के बाद एक और ऐसा त्यौहार जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। एक ऐसा त्यौहार है जब सबके रंग एक जैसे हो जाते हैं और हर तरह का भेदभाव दूर हो जाता है। तो आइये पढ़ते हैं होली पर छोटी कविताएँ :-

होली पर छोटी कविताएँ

होली पर छोटी कविताएँ

1. होली आई होली आई

होली आई होली आई, रंगों के संग खुशियाँ लायी
ग्रीष्म ऋतु है आने वाली, शीत ऋतु की हुयी विदाई,
होली आई होली आई, रंगों के संग खुशियाँ लायी।

धूम मचाएँगे होली में, सारे बच्चे मिलजुल कर
जश्न मनाएंगे होली का, इक दूजे को रंग मल कर,
आधी रात को एक साथ है, सबने आज होलिका जलाई
होली आई होली आई, रंगों के संग खुशियाँ लायी।

मारेंगे रंगों की बौछारें भरकर हम पिचकारी से
इस बार न खाली छोड़ेंगे, बैठे हैं हम पूरी तैयारी से,
खेल के होली साथ में हम फिर, खायेंगे भरपेट खूब मिठाई
होली आई होली आई, रंगों के संग खुशियाँ लायी।

बैर भुला कर सारे हम, सबको अपने गले लगायेंगे,
बुरी आदतों को इस होली, खुद से दूर भगायेंगे,
ठंडी में हम ठिठुर रहे थे, इसने है आकर जान बचायी,
होली आई होली आई, रंगों के संग खुशियाँ लायी।

होली आई होली आई, रंगों के संग खुशियाँ लायी
ग्रीष्म ऋतु है आने वाली, शीत ऋतु की हुयी विदाई,
होली आई होली आई, रंगों के संग खुशियाँ लायी।

पढ़िए :- होली पर एक छोटी हास्य कहानी


2. होली आई उड़े गुलाल

होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल,
मस्ती में सब झूम रहे हैं, रंगते हुए इक दूजे के गाल,
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

भोलू, पिंटू, रिंकू, भोलू, कोई भी न पहचाना जाए,
कोई किसी को भी मिलता है, मिलते ही वो रंग लगाये
शोर शराबा मचा हुआ है, मचा रहें है सभी धमाल,
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई इनमें भी कोई भेद न भाई
मिल कर सब होली खेलें और मिल कर ही खाते हैं मिठाई
होली के पावन उत्सव पर ये बना रहें है नयी मिसाल
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

तभी हमारे चाचा ने हमको एक कथा सुनाई
कैसे होलिका जली आग में, फिर सबने होली थी मनाई
भक्ति की शक्ति से कैसे हुआ था फिर एक नया कमाल
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

होली की इस बड़ी ख़ुशी में छोटू लाया नयी पिचकारी,
भर के रंग जोर से मारे, भिगा रहा सारे नर-नारी
बच्चे, बूढ़े और जवान सबके रंग उठे हैं बाल
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल,
मस्ती में सब झूम रहे हैं, रंगते हुए इक दूजे के गाल,
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

होली पर छोटी कविताएँ आपको कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं।

पढ़िए होली से संबंधित ये बेहतरीन रचनाएं :-

धन्यवाद।

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2 comments

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Laxmikant रुद्रायुष March 8, 2019 - 12:09 PM

बेहतरीन सृजन ????????????????????????????????????

Reply
Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh March 8, 2019 - 8:17 PM

धन्यवाद लक्ष्मीकांत रुद्रायुष जी….

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