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छोटे भाई पर कविता :- राम को जैसे मिले थे लक्ष्मण | भाई भाई के लिए कविता

by Sandeep Kumar Singh

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इस कविता के भाव वही पाठक समझ सकते हैं जिनका कोई छोटा भाई है। छोटा होने की वजह से वो सबका लाडला तो होता ही है साथ ही शैतान भी बहुत होता है। घर मे सबसे ज्यादा प्यार उसी पर लुटाया जाता है। उसके घर में रहने से एक अलग ही रौनक रहती है और जब वह कहीं बाहर जाता है तो घर मने एक ख़ामोशी सी छा जाती हैै। बाकी क्या-क्या होता है छोटे भाई में आइए पढ़ते हैं छोटे भाई पर कविता में :-

छोटे भाई पर कविता

छोटे भाई पर कविता

राम को जैसे मिले थे लक्ष्मण
बलराम को कृष्ण कन्हाई,
ऐसे ही इस जनम में मुझको
मिला है मेरा प्यारा भाई,

घर में उस से ही रौनक रहती
हरकत करता है बचकानी,
उम्र बढ़ रही है फिर भी
अब तक करता है शैतानी,

न चिंता माथे पर रहती
न होठों पर खामोशी,
ऐसा कोई काम न करता
जिस से हो कभी नमोशी,

जितना वो लड़ता है मुझसे
उतना ही प्यार जताता है,
चेहरे पर देख कर उलझन वो
झट उसको दूर भगाता है,

उम्र भले छोटी है मुझसे
पर बातें करता सयानी है,
हर घटना को ऐसे बताता
जैसे कोई कहानी है,

कितना भी डराऊँ उसको मैं
वो कभी न मुझसे डरता है,
मेरी हर एक बात में वो
मेरे लिए हामी भरता है,

कैसे बयां करूँ मैं कैसी
किस्मत है मैंने पायी,
भगवान सरीखे माँ-बाप हैं मेरे
फरिश्ते जैसा भाई,

राम को जैसे मिले थे लक्ष्मण
बलराम को कृष्ण कन्हाई,
ऐसे ही इस जनम में मुझको
मिला है मेरा प्यारा भाई।

छोटे भाई पर कविता हिंदी कविता:-

Chhote Bhai Par Kavita | छोटे भाई पर कविता ( राम को जैसे मिले थे लक्ष्मण ) Poem On Brother In Hindi

यह कविता आपको कैसी लगी? अपने विचार कमेंट बॉक्स के माध्यम से हम तक अवश्य पहुंचाएं।

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धन्यवाद।

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9 comments

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Muskan shukla July 23, 2020 - 8:52 PM

Mera chota bhai h & aaj hi hmaara jahgda hua….or is poem ko pdh ke bhaut rooone ka man kr rha h & i don't feel better right now ???? i just want to cry in his arms ????????????but vo chota h smjhdar nhi hai ????I love him so much but how I express ????I don't know this thing..this poem made me cry????

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Mujahid ali May 4, 2020 - 12:17 PM

Ye kavita pad kar aisA lag ra hai jaise mai aapne bhai se gale lag kar ro liya

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh May 4, 2020 - 3:56 PM

Ji Mujahid ji hume khushi hai ki apko kavita pasand aayi…

Bahut-bahut dhanyawad

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Rani August 21, 2019 - 1:09 PM

बहुत ही अच्छी कविता है ।दिल से निकली है सर ????????❤❤

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Sanjeev pathak May 31, 2019 - 12:07 PM

Mera bhi ek chhota bhai tha bahut pyara tha same isi kavita ki tarah pr ek ghatna me bhagvan ne mujhse mera bhai chheen liya bhagvan acha nhi hai bilkul bhi nhi usne mere bhai ko mujhse door kar diya ab mujhe mera Sara jeevan hi bekar lagta hai

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Rajeev Kumar April 7, 2019 - 10:22 AM

Aankhon me aansu la diye aapne sir sach me mera bhaii aisa hi hai

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh April 7, 2019 - 9:09 PM

धन्यवाद राजीव कुमार जी…

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Hariom Prajapat October 3, 2018 - 8:56 AM

सर वास्तव में यह कविता दिल से निकली हुई आवाज है

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh October 4, 2018 - 9:42 PM

धन्यवाद हरिओम जी…..

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