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आगरा के ताजमहल का इतिहास | Taj Mahal History In Hindi

by Sandeep Kumar Singh

Taj Mahal History In Hindi – आगरा का ताजमहल तो आप सब ने देखा होगा। किसी ने टीवी पर किसी ने फोटो में। सभी जानते होंगे कि मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में यह भव्य मकबरा बनवाया था। जो आज के समय में दुनिया के सात अजूबों में से एक है। लेकिन क्या आप जानते हैं ताज महल किसने बनाया था , ताज महल कब बना था और इसके बनने की असली वजह क्या थी? आइये जानते हैं इन्हीं प्रश्नों के उत्तर ‘ आगरा के ताजमहल का इतिहास ‘ ( Taj Mahal History In Hindi ) लेख में  और साथ ही जानेंगे कुछ ऐसी बातें जो शायद ही आप में से किसी को पता हों।

Taj Mahal History In Hindi
आगरा के ताजमहल का इतिहास

आगरा का ताजमहल

आज तक आप सबने ये सुना होगा या पढ़ा होगा कि आगरा का भव्य महल, ताजमहल मुमताज की याद में बनवाया गया था। सबसे पहले आप इस बात पर ध्यान दें कि आगरा का ताजमहल कोई महल नहीं बल्कि एक मकबरा है। जो अपनी सुन्दरता, शांति और अद्भुत निर्माण के लिए जाना जाता है। ताजमहल मुमताज महल की याद में नहीं बल्कि किसी और कारण से बनवाया था। क्या है वो कारण आइये जानते हैं। लेकिन उस से पहले जानते हैं की ताजमहल किसने बनवाया था ।

Taj Mahal Details In Hindi

ताजमहल किसने बनवाया था

ताजमहल का निर्माण मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था। यूँ तो मुग़ल बादशाह की कई रानियाँ थीं लेकिन मुमताज को वो सबसे ज्यादा प्यार करते थे। मुमताज उनकी तीसरी पत्नी थीं। इतना ही नहीं वह उन्हें हर जगह अपने साथ रखते थे। इसी तरह जब शाहजहाँ सन 1631 में दक्षिण भारत पर हमला करने के लिए सफ़र कर रहे थे। उस समय भी बादशाह की पसंदीदा बेगम मुमताज महल उनके साथ ही थीं।

सफ़र के समय मुमताज महल गर्भवती थीं। 17 जून, 1631 को मध्य प्रदेश के बुरहान शहर में मुमताज महल अपनी चौदहवीं संतान जोकि एक बेटी थी, को जन्म देते समय मर गयीं। शाहजहाँ की उस बेटी का नाम गौहर आरा बेगम था। मुमताज महल को बुरहानपुर में ही दफना दिया गया था।

ताज महल का रहस्य
( Taj Mahal Ka Rahasya Hindi Me )

बादशाह शाहजहाँ को मुमताज महल जिनका वास्तविक नाम आरजूमंद बानू बेगम था, की मौत का इतना गहरा सदमा पहुंचा कि उन्होंने आठ दिन तक कुछ नहीं खाया। इतना ही नहीं इतिहासिक ग्रंथों से पता चलता है कि उन्होंने 2 साल तक न कोई संगीत सुना, न कोई आभूषण पहना और न ही इत्र का प्रयोग किया।

सबको लगता है कि शाहजहाँ ने ताजमहल उनकी बेग़म मुमताज की याद में ही ताजमहल बनवाया था। मगर यह तथ्य सही नहीं है। मुमताज के मरने के बाद शाहजहाँ के जीने की कोई ख़ास वजह नहीं बची थी। लेकिन मुमताज महल ने मरने से पहले शाहजहाँ के आगे अपनी एक अंतिम इच्छा रखी थी। वह अंतिम इच्छा यह थी कि शाहजहाँ एक ऐसा मकबरा बनवाए जो पूरी दुनिया ने आज तक न देखा हो। शाहजहाँ के जीने का अब बस यही एक कारण था।

ताज महल किसने बनाया था

ताजमहल का निर्माण उस्ताद अहमद लाहौरी ने किया था। ये वही कारीगर थे जिन्होंने दिल्ली का लाल किला बनाया था। यमुना नदी के किनारे इस बड़ी सी ईमारत को बनाना उस समय इतना आसान नहीं था। फिर भी उस समय के कारीगरों ने ये काम कर दिखाया।

ताज महल कब बना था

मुमताज की आखिरी ख्वाहिश पूरी करने के लिए शाहजहाँ ने सन 1632 में ताजमहल बनवाने कि शुरुआत की।

ताज महल के निर्माण कार्य में 20,000 के करीब मजदूर एक साथ काम करते थे। इतना ही नहीं इसके निर्माण में लगने वाली वस्तुओं को लाने के लिए 1,000 हाथियों को भी काम पर लगाया था।

अंदरूनी निर्माण के लिए ईटें पकाने के लिए वहीं एक भट्ठा बना लिया गया था। निर्माण के लिए पराभासी श्वेत संगमर्मर को राजस्थान से लाया गया था, जेस्पर को पंजाब से, हरिताश्म या जेड एवं स्फटिक या क्रिस्टल को चीन से। तिब्बत से फीरोजा़, अफगानिस्तान से लैपिज़ लजू़ली, श्रीलंका से नीलम एवं अरबिया से इंद्रगोप या (कार्नेलियन) लाए गए थे। कुल मिला कर अठ्ठाइस प्रकार के बहुमूल्य पत्थर एवं रत्न श्वेत संगमर्मर में जड़े गए थे।

शाहजहाँ ने इसके निर्माण में अपना सारा धन लगा दिया और जब धन कम पड़ने लगा तो अपने राज्य के लोगों पर कर ( टैक्स ) बढ़ा दिया। राज्य को दिया जाने वाला अनाज आगरा मजदूरों के लिए मंगवाया जाने लगा। जिसके कारण प्रजा तंगी का सामना करने लगी। इस तरह काफी मुश्किलों का सामना करते हुए अंततः सन 1652 में ताजमहल का निर्माण सम्पूर्ण हुआ।

इसी दौरान ही मुमताज महल का शव जोकि बुरहानपुर में दफनाया गया था, को निकल कर लाया गया और ताजमहल में दफनाया गया।



ताज महल के बारे में अफवाहें

ऐसा कहा जाता है कि शाहजहाँ ने आगरा का ताजमहल बनाने वाले कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे। ऐसा नहीं था। इतिहासकारों एक मुताबिक शाहजहाँ ने उन कारीगरों को आजीवन धन देने का वादा किया था।

कुछ अफवाहें ऐसी भी उडती हैं कि दिन के समय के साथ ताजमहल का रंग बदलता है। ऐसा बिलकुल भी नहीं है। ताजमहल की सतह सफ़ेद है इसलिए जब सूर्य की रौशनी उसकी सतह पर पड़ती है तो वैसा ही रंग चारों ओर फैलता है जैसा सूर्य का होता है।

( नोट :- यदि आप ने भी सुनी है ताजमहल के बारे में कुछ अजीब बात तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। हम उसकी सच्चाई ढूँढने का प्रयास जरूर करेंगे। )

क्या हुआ फिर शाहजहाँ का

ताजमहल बनाने के बाद जब राज्य की हालत बिगड़ी हुयी थी। तब शाहजहाँ के बेटे औरंगजेब ने अपने भाइयों को मरवा कर अपने पिता शाहजहाँ को आगरा के लाल किले में कैद कर लिया। उसके बाद शाहजहाँ का बाकी जीवन उस लाल किले में से ताज महल को निहारते हुए ही बीता और 22 जनवरी, 1666 को उसी लाल किले में उसकी मौत हो गयी।

औरंगजेब ने ताजमहल के अन्दर ही मुमताज महल की कब्र के पास ही अपने पिओता शाहजहाँ को दफना कर उनकी भी कब्र बनवा दी।

Taj Mahal Timings
क्या है ताजमहल में प्रवेश करने का समय

ताजमहल में सूर्योदय से आधा घंटा पहले प्रवेश द्वार खुल जाते हैं और सारा दिन खुले रहने के बाद सूर्य अस्त होने से आधा घंटा पहले बंद हो जाते हैं। यूँ तो ताज महल को देखने रोज हजारों की संख्या में लोग आते हैं लेकिन शुक्रवार के दिन ताजमहल दर्शकों के लिए बंद रहता है। बस दोपहर में कुछ देर उन लोगों के लिए खुलता है जो अन्दर जाकर नमाज पढ़ते हैं।

क्या है टिकट का मूल्य

विदेशी नागरिकों के लिए आगरा ताजमहल देखना थोडा महंगा है। उनके लिए टिकट का मूल्य है 1100 रुपये प्रति व्यक्ति। सार्क (SAARC) या बिम्सटेक ( (BIMSTEC) ) के अंतर्गत आने वाले देश के व्यक्तियों के लिए टिकट का मूल्य 540 रुपये प्रति व्यक्ति है। भारतीय नागरिकों के लिए ताजमहल देखने का मूल्य 50 रुपये प्रति व्यक्ति है।

ताजमहल का मूल्य

जिस समय ताजमहल का निर्माण हुआ उस समय इसका मूल्य 3 करोड़ 20 लाख रुपये था। लेकिन यदि आज हम इसका मूल्य देखें तो 2015 में की गयी गणना के अनुसार इसका मूल्य 52.8 अरब रुपये है।

ताज महल की सुरक्षा

2006 में कुछ आतंकी धमकियों के कारण ताजमहल की सुरक्षा के लिए सुरक्षाकर्मी तैनात किये गए हैं। ताजमहल के अन्दर की तस्वीर लेने पर मनाही है। 2006 में मिली धमकियों के बाद किसीको ताजमहल पर रिसर्च करने की आज्ञा नहीं है।

हमें उम्मीद है आपने इस से पहले ‘ आगरा के ताजमहल का इतिहास ‘ ( Taj Mahal History In Hindi ) के बारे में ये सारी बातें नहीं पढ़ी होंगी। यदि आप ताजमहल के बारे में कोई और जानकारी या किसी अन्य ऐतिहासिक ईमारत के बारे में जानना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। इस लेख के बारे में भी अपने विचार लिखना न भूलें।

पढ़िए अप्रतिम ब्लॉग पर यह रोचक जानकारियां :-

धन्यवाद।

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4 comments

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AMIT KUMAR SINGH January 9, 2020 - 12:40 PM

CAN I USE YOUR ARTICALS ON MY YOUTUBE CHANNEL… PLEASE TELL ME BRO…

Reply
Chandan Bais
Chandan Bais January 9, 2020 - 3:14 PM

Ok, but you have to give us proper credits,
A link in the description article and credit on video.

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अल्फैज़ अहमद अंसारी January 26, 2019 - 6:08 PM

Very Nice

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Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh January 30, 2019 - 8:45 PM

धन्यवाद अल्फैज़ अहमद जी…

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